Ghazal Poetry (page 514)
क्या कहा फिर तो कहो दिल की ख़बर कुछ भी नहीं
मोहम्मद अली तिशना
आँख पड़ती है कहीं पाँव कहीं पड़ता है
मोहम्मद अली तिशना
तू अगर बा-उसूल हो जाए
मोहम्मद अली साहिल
तिरी सूरत मुझे बताती है
मोहम्मद अली साहिल
राह-ए-हक़ में तुझे हस्ती को मिटाना होगा
मोहम्मद अली साहिल
मज़ाक़-ए-ग़म उड़ाना अब मुझे अच्छा नहीं लगता
मोहम्मद अली साहिल
जुस्तुजू तेरी तरह ग़म तिरी क़ुर्बत क्या है
मोहम्मद अली साहिल
जतन करता तो हूँ लेकिन ये बीमारी नहीं जाती
मोहम्मद अली साहिल
होश खो कर जोश में कुछ इस तरह मैं बह गया
मोहम्मद अली साहिल
ग़ुर्बत का अब मज़ाक़ उड़ाने लगे हैं लोग
मोहम्मद अली साहिल
बुज़-दिली तो वो कर नहीं सकता
मोहम्मद अली साहिल
ऐसा नहीं सलाम किया और गुज़र गए
मोहम्मद अली साहिल
अब हक़ीक़त लग रहा है मेरा अफ़्साना मुझे
मोहम्मद अली साहिल
सभी तारे सभी जुगनू मेरे
मोहम्मद अली मोज
रात भी तेरा ध्यान भी हम भी
मोहम्मद अली मोज
दूर तक राह में काँटे हैं बहुत
मोहम्मद अली मोज
सुकूत-ए-शाम समुंदर परिंदगाँ सूरज
मोहम्मद अली मंज़र
ख़राब-ओ-ख़स्ता सही साएबाँ बनाया है
मोहम्मद अली मंज़र
ग़ुस्सा आता है प्यार आता है
मोहम्मद अली ख़ाँ रश्की
तुम यूँ ही समझना कि फ़ना मेरे लिए है
मोहम्मद अली जौहर
तिश्ना-लब हूँ मुद्दतों से देखिए
मोहम्मद अली जौहर
तन्हाई के सब दिन हैं तन्हाई की सब रातें
मोहम्मद अली जौहर
क़ैद और क़ैद भी तन्हाई की
मोहम्मद अली जौहर
किस से आज़ुर्दा मिरे क़ातिल का ख़ंजर हो गया
मोहम्मद अली जौहर
ख़ूगर-ए-जौर पे थोड़ी सी जफ़ा और सही
मोहम्मद अली जौहर
ख़ाक जीना है अगर मौत से डरना है यही
मोहम्मद अली जौहर
हम मआनी-ए-हवस नहीं ऐ दिल हवा-ए-दोस्त
मोहम्मद अली जौहर
गिला ऐ दिल अभी से करता है
मोहम्मद अली जौहर
दिल को हलाक-ए-जल्वा-ए-जानाँ बनाइए
मोहम्मद अली जौहर
दौर-ए-हयात आएगा क़ातिल क़ज़ा के ब'अद
मोहम्मद अली जौहर