Ghazal Poetry (page 518)

तलफ़ करेगी कब तक आरज़ू की जान आरज़ू

मोहम्मद अाज़म

सुबुक मुझ को मोहब्बत में ये कज-उफ़्ताद करता है

मोहम्मद अाज़म

सब है ज़ेर-ए-बहस जो ज़ाहिर है या पोशीदा है

मोहम्मद अाज़म

रक्खा था जिसे दिल में वो अब है भी नहीं भी

मोहम्मद अाज़म

मोहब्बत चाहती है जिस को अफ़्साना बना देना

मोहम्मद अाज़म

कुछ ग़रज़ हम को नहीं है कि कहाँ ले जाए

मोहम्मद अाज़म

कमान सौंप के दुश्मन को अपने लश्कर की

मोहम्मद अाज़म

इस बे-ख़ुदी में रुख़्सत ख़ुद्दारी हो गई है

मोहम्मद अाज़म

हम आदम-ज़ाद जो हैं रोज़-ए-अव्वल से कमी है ये

मोहम्मद अाज़म

होने को अब क्या देखिए क्या कुछ है और क्या कुछ नहीं

मोहम्मद अाज़म

हँसी में टाल रहे हो तुम उस के रोने को

मोहम्मद अाज़म

हब्स तअल्लुक़ात में दूर न जा इधर उधर

मोहम्मद अाज़म

गुदाज़ तक ही ख़राबी हुनर सँभालेगा

मोहम्मद अाज़म

गिराँ था मत्न मुश्किल और भी ताबीर पढ़ लेना

मोहम्मद अाज़म

गए हैं देस को हम अपने छोड़ कर ही नहीं

मोहम्मद अाज़म

इक नश्तर-ए-निगाह है इस से ज़ियादा क्या

मोहम्मद अाज़म

देखा कि चले जाते थे सब शौक़ के मारे

मोहम्मद अाज़म

अगर न मानें न समझो कि जानते ही नहीं

मोहम्मद अाज़म

तुम्हारे साथ कई राब्ते नज़र आए

मोहम्मद नसीम कुरैशी

तू अपने पिंदार की ख़बर ले कि रुख़ हवा का बदल रहा है

मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी

शुऊर-ए-ज़ात थोड़ा सा दिल-ए-नादाँ में रखते हैं

मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी

मुफ़्त है ख़ून-ए-जिगर अज़्मत-ए-किरदार के साथ

मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी

मिलती है नज़र उन से तो खो जाते हैं हम और

मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी

हुस्न-ए-ज़न काम लीजे बद-गुमानी फिर सही

मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी

हम ने तन्हा-नशीनी ख़रीदी तो है रौनक़ ओ शोरिश-ए-अंजुमन बेच कर

मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी

हवा से बादा निचोड़ें कली को जाम करें

मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी

हस्ती के हर इक मोड़ पे आईना बना हूँ

मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी

हर कड़े वक़्त पे आईना दिखाया है मुझे

मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी

दिल-ए-बे-क़रार चला तो था गिला-ए-हयात लिए हुए

मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी

दिल में जिन्हें उतारते दिल से वही उतर गए

मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी