Ghazal Poetry (page 883)
तेरे लिए चले थे हम तेरे लिए ठहर गए
अदीम हाशमी
तमाम उम्र की तन्हाई की सज़ा दे कर
अदीम हाशमी
तअल्लुक़ अपनी जगह तुझ से बरक़रार भी है
अदीम हाशमी
शोर सा एक हर इक सम्त बपा लगता है
अदीम हाशमी
शामिल था ये सितम भी किसी के निसाब में
अदीम हाशमी
सर-ए-सहरा मुसाफ़िर को सितारा याद रहता है
अदीम हाशमी
रख़्त-ए-सफ़र यूँही तो न बेकार ले चलो
अदीम हाशमी
राहत-ए-जाँ से तो ये दिल का वबाल अच्छा है
अदीम हाशमी
मुफ़ाहमत न सिखा जब्र-ए-नारवा से मुझे
अदीम हाशमी
मेरे रस्ते में भी अश्जार उगाया कीजे
अदीम हाशमी
मैं गुफ़्तुगू हूँ कि तहरीर के जहान में हूँ
अदीम हाशमी
लोगों के दर्द अपनी पशेमानियाँ मिलीं
अदीम हाशमी
क्यूँ मिरे लब पे वफ़ाओं का सवाल आ जाए
अदीम हाशमी
कुछ हिज्र के मौसम ने सताया नहीं इतना
अदीम हाशमी
कोई पत्थर कोई गुहर क्यूँ है
अदीम हाशमी
किसी झूटी वफ़ा से दिल को बहलाना नहीं आता
अदीम हाशमी
किस हवाले से मुझे किस का पता याद आया
अदीम हाशमी
जब बयाँ करोगे तुम हम बयाँ में निकलेंगे
अदीम हाशमी
हम बहर-ए-हाल दिल ओ जाँ से तुम्हारे होते
अदीम हाशमी
ग़म के हर इक रंग से मुझ को शनासा कर गया
अदीम हाशमी
ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया
अदीम हाशमी
फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था
अदीम हाशमी
इक पल बग़ैर देखे उसे क्या गुज़र गया
अदीम हाशमी
इक खिलौना टूट जाएगा नया मिल जाएगा
अदीम हाशमी
दर्द होते हैं कई दिल में छुपाने के लिए
अदीम हाशमी
चल दिया वो देख कर पहलू मिरी तक़्सीर का
अदीम हाशमी
बस कोई ऐसी कमी सारे सफ़र में रह गई
अदीम हाशमी
बड़ा वीरान मौसम है कभी मिलने चले आओ
अदीम हाशमी
ऐसा भी नहीं उस से मिला दे कोई आ कर
अदीम हाशमी
आया हूँ संग ओ ख़िश्त के अम्बार देख कर
अदीम हाशमी