ख्वाब Poetry (page 40)
है शोर साहिलों पर सैलाब आ रहा है
फ़रहत एहसास
एक ग़ज़ल कहते हैं इक कैफ़िय्यत तारी कर लेते हैं
फ़रहत एहसास
दिनी हैं सब कोई राती नहीं है
फ़रहत एहसास
देखते ही देखते खोने से पहले देखते
फ़रहत एहसास
बीमार हो गया हूँ शिफा-ख़ाना चाहिए
फ़रहत एहसास
बहुत सी आँखें लगीं हैं और एक ख़्वाब तय्यार हो रहा है
फ़रहत एहसास
औरों का सारा काम मुझे दे दिया गया
फ़रहत एहसास
अब दिल की तरफ़ दर्द की यलग़ार बहुत है
फ़रहत एहसास
मैं बे-ख़याल कभी धूप में निकल आऊँ
फ़रहत अब्बास शाह
तुम्हारे ख़्वाब मिरे साथ साथ चलते हैं
फ़रहत अब्बास शाह
मौत का वक़्त गुज़र जाएगा
फ़रहत अब्बास शाह
ज़िक्र-ए-शब के सईद हो गए क्या
फ़रहत अब्बास
ख़याल आतिशीं ख़्वाबीदा सूरतें दी हैं
फ़रहत अब्बास
शौक़ आसूदा-ए-तहलील-ए-मुअम्मा न हुआ
फ़रहान सालिम
खो बैठी है सारे ख़द-ओ-ख़ाल अपनी ये दुनिया
फ़रहान सालिम
हमा-जिहत मिरी तलब जिस की मिसाल अब नहीं
फ़रीद परबती
ये कहाँ से मौज-ए-तरब उठी कि मलाल दिल से निकल गए
फ़रीद जावेद
ये कहाँ से मौज-ए-तरब उठी कि मलाल दिल से निकल गए
फ़रीद जावेद
तल्ख़ गुज़रे कि शादमाँ गुज़रे
फ़रीद जावेद
तल्ख़ गुज़रे कि शादमाँ गुज़रे
फ़रीद जावेद
तल्ख़ गुज़रे कि शादमाँ गुज़रे
फ़रीद जावेद
पहुँच के हम सर-ए-मंज़िल जिन्हें भुला न सके
फ़रीद जावेद
पहुँच के हम सर-ए-मंज़िल जिन्हें भुला न सके
फ़रीद जावेद
ना-शगुफ़्ता कलियों में शौक़ है तबस्सुम का
फ़रीद जावेद
किस उजाले का निशाँ हैं हम लोग
फ़रीद जावेद
किस से वफ़ा की है उमीद कौन वफ़ा-शिआर है
फ़रीद जावेद
किस से वफ़ा की है उमीद कौन वफ़ा-शिआ'र है
फ़रीद जावेद
हम जिसे समझते थे सई-ए-राएगाँ यारो
फ़रीद जावेद
अभी मकाँ मैं अभी सू-ए-ला-मकाँ हूँ मैं
फ़रीद जावेद
अभी मकाँ मैं अभी सू-ए-ला-मकाँ हूँ मैं
फ़रीद जावेद