Heart Broken Poetry (page 196)
लाख पर्दे से रुख़-ए-अनवर अयाँ हो जाएगा
मिर्ज़ा रज़ा बर्क़
जब अयाँ सुब्ह को वो नूर-ए-मुजस्सम हो जाए
मिर्ज़ा रज़ा बर्क़
गया शबाब न पैग़ाम-ए-वस्ल-ए-यार आया
मिर्ज़ा रज़ा बर्क़
देखी जो ज़ुल्फ़-ए-यार तबीअत सँभल गई
मिर्ज़ा रज़ा बर्क़
चाँद सा चेहरा जो उस का आश्कारा हो गया
मिर्ज़ा रज़ा बर्क़
ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है
मिर्ज़ा रज़ा बर्क़
हिन्द के जाँ-बाज़ सिपाही
बर्क़ देहलवी
दिल जो सूरत-गर-ए-मअ'नी का सनम-ख़ाना बने
बर्क़ देहलवी
वक़्त का पत्थर भारी होता जाता है
बाक़ी सिद्दीक़ी
उन का या अपना तमाशा देखो
बाक़ी सिद्दीक़ी
तेरी हर बात पे चुप रहते हैं
बाक़ी सिद्दीक़ी
हर याद हर ख़याल है लफ़्ज़ों का सिलसिला
बाक़ी सिद्दीक़ी
एक दीवार उठाने के लिए
बाक़ी सिद्दीक़ी
दिल में जब बात नहीं रह सकती
बाक़ी सिद्दीक़ी
यूँ भी होने का पता देते हैं
बाक़ी सिद्दीक़ी
यूँ भी होने का पता देते हैं
बाक़ी सिद्दीक़ी
वो नज़र आईना-फ़ितरत ही सही
बाक़ी सिद्दीक़ी
वो मक़ाम-ए-दिल-ओ-जाँ क्या होगा
बाक़ी सिद्दीक़ी
वो अंधेरा है जिधर जाते हैं हम
बाक़ी सिद्दीक़ी
वक़्त रस्ते में खड़ा है कि नहीं
बाक़ी सिद्दीक़ी
वफ़ा के ज़ख़्म हम धोने न पाए
बाक़ी सिद्दीक़ी
उन का या अपना तमाशा देखो
बाक़ी सिद्दीक़ी
तुम कब थे क़रीब इतने मैं कब दूर रहा हूँ
बाक़ी सिद्दीक़ी
तिरी निगाह का अंदाज़ क्या नज़र आया
बाक़ी सिद्दीक़ी
तारे दर्द के झोंके बन कर आते हैं
बाक़ी सिद्दीक़ी
सुब्ह का भेद मिला क्या हम को
बाक़ी सिद्दीक़ी
रस्म-ए-सज्दा भी उठा दी हम ने
बाक़ी सिद्दीक़ी
रंग-ए-दिल रंग-ए-नज़र याद आया
बाक़ी सिद्दीक़ी
नद्दी के उस पार खड़ा इक पेड़ अकेला
बाक़ी सिद्दीक़ी
मरहले ज़ीस्त के आसान हुए
बाक़ी सिद्दीक़ी