Heart Broken Poetry (page 197)
मरहला दिल का न तस्ख़ीर हुआ
बाक़ी सिद्दीक़ी
क्यूँ सबा की न हो रफ़्तार ग़लत
बाक़ी सिद्दीक़ी
क्या पता हम को मिला है अपना
बाक़ी सिद्दीक़ी
ख़बर कुछ ऐसी उड़ाई किसी ने गाँव में
बाक़ी सिद्दीक़ी
कहता है हर मकीं से मकाँ बोलते रहो
बाक़ी सिद्दीक़ी
जुनूँ की राख से मंज़िल में रंग क्या आए
बाक़ी सिद्दीक़ी
इस कार-ए-गह-ए-रंग में हम तंग नहीं क्या
बाक़ी सिद्दीक़ी
हम ज़र्रे हैं ख़ाक-ए-रहगुज़र के
बाक़ी सिद्दीक़ी
हम कहाँ आइना ले कर आए
बाक़ी सिद्दीक़ी
हर तरफ़ बिखर हैं रंगीं साए
बाक़ी सिद्दीक़ी
एतिबार-ए-नज़र करें कैसे
बाक़ी सिद्दीक़ी
दिल से बाहर हैं ख़रीदार अभी
बाक़ी सिद्दीक़ी
दिल जिंस-ए-मोहब्बत का ख़रीदार नहीं है
बाक़ी सिद्दीक़ी
दाग़-ए-दिल हम को याद आने लगे
बाक़ी सिद्दीक़ी
अपनी धूप में भी कुछ जल
बाक़ी सिद्दीक़ी
ऐसा वार पड़ा सर का
बाक़ी सिद्दीक़ी
आस्तीं में साँप इक पलता रहा
बाक़ी सिद्दीक़ी
सब दोस्त मस्लहत के दुकानों में बिक गए
बाक़ी अहमदपुरी
यूँ सितमगर नहीं होते जानाँ
बाक़ी अहमदपुरी
उड़े नहीं हैं उड़ाए हुए परिंदे हैं
बाक़ी अहमदपुरी
उदास बाम है दर काटने को आता है
बाक़ी अहमदपुरी
तू नहीं तो तेरा दर्द-ए-जाँ-फ़ज़ा मिल जाएगा
बाक़ी अहमदपुरी
तेरी तरह मलाल मुझे भी नहीं रहा
बाक़ी अहमदपुरी
सामने सब के न बोलेंगे हमारा क्या है
बाक़ी अहमदपुरी
रोज़-ए-वहशत है मिरे शहर में वीरानी की
बाक़ी अहमदपुरी
मुझ से बिछड़ के वो भी परेशान था बहुत
बाक़ी अहमदपुरी
दश्त-ओ-दरिया के ये उस पार कहाँ तक जाती
बाक़ी अहमदपुरी
बहुत जल्दी थी घर जाने की लेकिन
बाक़ी अहमदपुरी
मत तंग हो करे जो फ़लक तुझ को तंग-दस्त
बक़ा उल्लाह 'बक़ा'
काबा तो संग-ओ-ख़िश्त से ऐ शैख़ मिल बना
बक़ा उल्लाह 'बक़ा'