Hope Poetry (page 125)
जुनून-ए-शौक़ अब भी कम नहीं है
असरार-उल-हक़ मजाज़
बर्बाद-ए-तमन्ना पे इताब और ज़ियादा
असरार-उल-हक़ मजाज़
अक़्ल की सतह से कुछ और उभर जाना था
असरार-उल-हक़ मजाज़
आशिक़ी जाँ-फ़ज़ा भी होती है
असरार-उल-हक़ मजाज़
कैसे रफ़ू हों चाक-ए-गरेबाँ मैं भी सोचूँ तू भी सोच
असरारुल हक़ असरार
जानते थे ग़म तिरा दरिया भी था गहरा भी था
असरारुल हक़ असरार
तक़द्दुस-ए-मआब
असरार जामई
लीडर की दुआ
असरार जामई
फ़ख़्र-ए-जाहिलां
असरार जामई
चमचे की दुआ
असरार जामई
बकरा
असरार जामई
दो-जहाँ के हुस्न का अरमान आधा रह गया
असरार अकबराबादी
वस्ल की जो ख़्वाहिश है
असरा रिज़वी
ख़्वाब इक जज़ीरा है
असरा रिज़वी
ख़िज़ाँ का मौसम
असरा रिज़वी
आओ चलें उस खंडर में
असरा रिज़वी
ज़िंदगी उलझी है बिखरे हुए गेसू की तरह
असरा रिज़वी
ये आग मोहब्बत की बुझाए न बुझे है
असरा रिज़वी
वो शख़्स फिर कहानी का उन्वान बन गया
असरा रिज़वी
उदास आँखें ग़ज़ाल आँखें
असरा रिज़वी
फिर कोई ताज़ा-सितम वो सितम-ईजाद करे
असरा रिज़वी
मैं सच तो कह दूँ पर उस को कहीं बुरा न लगे
असरा रिज़वी
बालीदगी-ए-ज़र्फ़ पे दिखलाए गए लोग
असरा रिज़वी
ऐसा ये दर्द है कि भुलाया न जाएगा
असरा रिज़वी
अदावतों का ये उस को सिला दिया हम ने
असरा रिज़वी
आग जो दिल में लगी है वो बुझा दी जाए
असरा रिज़वी
मुझे दरिया बनाना चाहती है
असलम राशिद
है मुअम्मा या कहानी इश्क़ है
असलम राशिद
रात आती है तो ताक़ों में जलाते हैं चराग़
असलम महमूद
कहाँ भटकती फिरेगी अँधेरी गलियों में
असलम महमूद