Hope Poetry (page 127)
यादों का लम्स ज़ेहन को छू कर गुज़र गया
असलम आज़ाद
वक़्त का कुछ रुका सा धारा है
असलम आज़ाद
रास्ता सुनसान था तो मुड़ के देखा क्यूँ नहीं
असलम आज़ाद
अजीब शख़्स है मुझ को तो वो दिवाना लगे
असलम आज़ाद
दीवार-ए-ख़स्तगी हूँ मुझे हाथ मत लगा
असलम अंसारी
फ़क़त हर्फ़-ए-तमन्ना क्या है
असलम अंसारी
एक नज़्म
असलम अंसारी
ऐ ज़मिस्ताँ की हवा तेज़ न चल
असलम अंसारी
वो नख़्ल जो बार-वर हुए हैं
असलम अंसारी
मुझे तो ये भी फ़रेब-ए-हवास लगता है
असलम अंसारी
कुछ तो ग़म-ख़ाना-ए-हस्ती में उजाला होता
असलम अंसारी
ख़फ़ा न हो कि तिरा हुस्न ही कुछ ऐसा था
असलम अंसारी
हर शख़्स इस हुजूम में तन्हा दिखाई दे
असलम अंसारी
गुबार-ए-एहसास-ए-पेश-ओ-पस की अगर ये बारीक तह हटाएँ
असलम अंसारी
बुझी है आतिश-ए-रंग-ए-बहार आहिस्ता आहिस्ता
असलम अंसारी
अपनी सदा की गूँज ही तुझ को डरा न दे
असलम अंसारी
ऐन-मुमकिन है किसी तर्ज़-ए-अदा में आए
असलम अंसारी
अब और चलने का इस दिल में हौसला ही न था
असलम अंसारी
आइने पर तो है भरोसा मुझे
आसिमा ताहिर
ये सोचा ही नहीं था तिश्नगी में
आसिमा ताहिर
ख़ुद मैं धूनी रमाए बैठी हूँ
आसिमा ताहिर
सीखा न दुआओं में क़नाअत का सलीक़ा
आसिम वास्ती
नहीं वो शम-ए-मोहब्बत रही तो फिर 'आसिम'
आसिम वास्ती
मिरी ज़बान के मौसम बदलते रहते हैं
आसिम वास्ती
लोग कहते हैं कि वो शख़्स है ख़ुशबू जैसा
आसिम वास्ती
अब यही सोचते रहते हैं बिछड़ कर तुझ से
आसिम वास्ती
तुम इंतिज़ार के लम्हे शुमार मत करना
आसिम वास्ती
तुम भटक जाओ तो कुछ ज़ौक़-ए-सफ़र आ जाएगा
आसिम वास्ती
मकाँ से दूर कहीं ला-मकाँ से होता है
आसिम वास्ती
कहाँ तलाश में जाऊँ कि जुस्तुजू तू है
आसिम वास्ती