Hope Poetry (page 129)

वो बे-हुनर हूँ कि है ज़िंदगी वबाल मुझे

अासिफ़ जमाल

सहरा से भी वीराँ मिरा घर है कि नहीं है

अासिफ़ जमाल

साए की तरह कोई मिरे साथ लगा था

अासिफ़ जमाल

मगर नहीं था फ़क़त 'मीर' ख़्वार मैं भी था

अासिफ़ जमाल

दिल है कि हमें फिर से उधर ले के चला है

अासिफ़ जमाल

कैसा तिलिस्म आज ये तारी है जिस्म में

अासिफ़ अंजुम

उन से मिला तो फिर मैं किसी का नहीं रहा

अशरफ़ शाद

थीं ज़मीनें गुम-शुदा और आसमाँ मिलता न था

अशरफ़ शाद

जो ज़िंदगी बची है उसे ख़ार क्या करें

अशरफ़ शाद

दे आया अपनी जान भी दरबार-ए-इश्क़ में

अशरफ़ शाद

हर एक रुख़ से मुझे लुत्फ़-ए-जुस्तुजू आए

अशरफ़ रफ़ी

23-मार्च अज़ान-ए-सुब्ह-ए-नियाज़

अशरफ़ जावेद

बदल के देख लिए ज़ाविए उड़ानों के

अशरफ़ जावेद

उठ चुका दिल मिरा ज़माने से

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

ख़ून आँखों से निकलता ही रहा

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

दिल धड़कता है कि तू यार है सौदाई का

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

डरता हूँ मोहब्बत में मिरा नाम न होवे

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

बहार आई है सोते को टुक जगा देना

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

अक्स भी कब शब-ए-हिज्राँ का तमाशाई है

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

अगर आशिक़ कोई पैदा न होता

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

दुआएँ कीजिए ग़ुंचों के मुस्कुराने की

अशोक साहनी साहिल

जो गुज़रती है कहा करता हूँ

अशोक साहनी साहिल

शम्-ए-इख़्लास-ओ-यक़ीं दिल में जला कर चलिए

अशोक साहनी

पलकों पे इंतिज़ार का मौसम सजा लिया

अशोक साहनी

जो ज़रूरी है कार कर पहले

अशोक साहनी

दिल की बस्ती में उजाला ही उजाला होता

अशोक साहिल

मेरी तरह ज़रा भी तमाशा किए बग़ैर

अशोक साहिल

यतीम इंसाफ़

अशोक लाल

विरासत

अशोक लाल

रौशनाई

अशोक लाल