Hope Poetry (page 130)

नींद

अशोक लाल

मेरे एहसास मेरे विसवास

अशोक लाल

लहू रोता है

अशोक लाल

आईने में ख़म आया

अशोक लाल

ये कश्ती-ए-हयात ये तूफ़ान-ए-हादसात

अश्क अमृतसरी

वो मेरा है तो कभी भी न आज़माऊँ उसे

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

हम ने देखा है इतने खंडर ख़्वाब में

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

आ जाओ अब तो ज़ुल्फ़ परेशाँ किए हुए

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

मैं सोचता तो हूँ लेकिन ये बात किस से कहूँ

अशफ़ाक़ अंजुम

मिरी ग़ज़ल गुनगुना रहा था

अशफ़ाक़ रशीद मंसूरी

हम आइने में तिरा अक्स देखने के लिए

अशफ़ाक़ नासिर

ताएरों की उड़ान में हम हैं

अशफ़ाक़ नासिर

रंज जो दीदा-ए-नमनाक में देखा गया है

अशफ़ाक़ नासिर

मैं सीखता रहा इक उम्र हाव-हू करना

अशफ़ाक़ नासिर

दिल किसी ख़्वाहिश का उकसाया हुआ

अशफ़ाक़ नासिर

अगर ख़ुशी में तुझे गुनगुनाते लगते हैं

अशफ़ाक़ नासिर

बहुत छोटा सा दिल और इस में इक छोटी सी ख़्वाहिश

अशफ़ाक़ हुसैन

यहीं कहीं कोई आवाज़ दे रहा था मुझे

अशफ़ाक़ हुसैन

उस आँख न उस दिल से निकाले हुए हम हैं

अशफ़ाक़ हुसैन

कहा किस ने मुसलसल काम करने के लिए है

अशफ़ाक़ हुसैन

ये रोग लगा है अजब हमें जो जान भी ले कर टला नहीं

अशफ़ाक़ आमिर

अब ए'तिबार पे जी चाहता तो है लेकिन

अशफ़ाक़ आमिर

लगा हो दिल तो ख़यालात कब बदलते हैं

अशफ़ाक़ आमिर

इक पल में क्या कुछ बदल गया जब बे-ख़बरों को ख़बर हुई

अशफ़ाक़ आमिर

शायद मिरी निगाह में कोई शिगाफ़ था

अशअर नजमी

न जाने कब कोई आ कर मिरी तकमील कर जाए

अशअर नजमी

कैनवस पर है ये किस का पैकर-ए-हर्फ़-ओ-सदा

अशअर नजमी

सुकूत-ए-शब के हाथों सोंप कर वापस बुलाता है

अशअर नजमी

शायद मिरी निगाह में कोई शिगाफ़ था

अशअर नजमी

मेरे उस के दरमियाँ ये फ़ासला अपनी जगह है

अशअर नजमी