Hope Poetry (page 132)
नहीं दैर ओ हरम से काम हम उल्फ़त के बंदे हैं
असग़र गोंडवी
माइल-ए-शेर-ओ-ग़ज़ल फिर है तबीअत 'असग़र'
असग़र गोंडवी
क्या मस्तियाँ चमन में हैं जोश-ए-बहार से
असग़र गोंडवी
जीना भी आ गया मुझे मरना भी आ गया
असग़र गोंडवी
दास्ताँ उन की अदाओं की है रंगीं लेकिन
असग़र गोंडवी
ज़ौक़-ए-सरमस्ती को महव-ए-रू-ए-जानाँ कर दिया
असग़र गोंडवी
यूँ न मायूस हो ऐ शोरिश-ए-नाकाम अभी
असग़र गोंडवी
वो नग़्मा बुलबुल-ए-रंगीं-नवा इक बार हो जाए
असग़र गोंडवी
तिरे जल्वों के आगे हिम्मत-ए-शरह-ओ-बयाँ रख दी
असग़र गोंडवी
सामने उन के तड़प कर इस तरह फ़रियाद की
असग़र गोंडवी
रक़्स-ए-मस्ती देखते जोश-ए-तमन्ना देखते
असग़र गोंडवी
पाता नहीं जो लज़्ज़त-ए-आह-ए-सहर को मैं
असग़र गोंडवी
पास-ए-अदब में जोश-ए-तमन्ना लिए हुए
असग़र गोंडवी
न खुले उक़्दा-हा-ए-नाज़-ओ-नियाज़
असग़र गोंडवी
मस्ती में फ़रोग़-ए-रुख़-ए-जानाँ नहीं देखा
असग़र गोंडवी
मय-ए-बे-रंग का सौ रंग से रुस्वा होना
असग़र गोंडवी
कोई महमिल-नशीं क्यूँ शाद या नाशाद होता है
असग़र गोंडवी
ख़ुदा जाने कहाँ है 'असग़र'-ए-दीवाना बरसों से
असग़र गोंडवी
जो नक़्श है हस्ती का धोका नज़र आता है
असग़र गोंडवी
जान-ए-नशात हुस्न की दुनिया कहें जिसे
असग़र गोंडवी
इश्वों की है न उस निगह-ए-फ़ित्ना-ज़ा की है
असग़र गोंडवी
इश्क़ है इक कैफ़-ए-पिन्हानी मगर रंजूर है
असग़र गोंडवी
हुस्न को वुसअतें जो दीं इश्क़ को हौसला दिया
असग़र गोंडवी
है दिल-ए-नाकाम-ए-आशिक़ में तुम्हारी याद भी
असग़र गोंडवी
गर्म-ए-तलाश-ओ-जुस्तुजू अब है तिरी नज़र कहाँ
असग़र गोंडवी
एक ऐसी भी तजल्ली आज मय-ख़ाने में है
असग़र गोंडवी
असरार-ए-इश्क़ है दिल-ए-मुज़्तर लिए हुए
असग़र गोंडवी
आलाम-ए-रोज़गार को आसाँ बना दिया
असग़र गोंडवी
जिस हुस्न की है चश्म-ए-तमन्ना को जुस्तुजू
असर सहबाई
तुम्हारी फ़ुर्क़त में मेरी आँखों से ख़ूँ के आँसू टपक रहे हैं
असर सहबाई