Hope Poetry (page 133)

ये सोचते ही रहे और बहार ख़त्म हुई

असर लखनवी

क्या क्या दुआएँ माँगते हैं सब मगर 'असर'

असर लखनवी

भूलने वाले को शायद याद वादा आ गया

असर लखनवी

तस्कीन-ए-दिल को अश्क-ए-अलम क्या बहाऊँ मैं

असर लखनवी

सहरा से चले हैं सू-ए-गुलशन

असर लखनवी

निगह-ए-शौक़ को यूँ आइना-सामानी दे

असर लखनवी

नवेद-ए-वस्ल-ए-यार आए न आए

असर लखनवी

न शरह-ए-शौक़ न तस्कीन जान-ए-ज़ार में है

असर लखनवी

काहे को ऐसे ढीट थे पहले झूटी क़सम जो खाते तुम

असर लखनवी

झपकी ज़रा जो आँख जवानी गुज़र गई

असर लखनवी

हिजाब-ए-रंग-ओ-बू है और मैं हूँ

असर लखनवी

दिल इश्क़ की मय से छलक रहा है

असर लखनवी

चुपके से नाम ले के तुम्हारा कभी कभी

असर लखनवी

बहार है तिरे आरिज़ से लौ लगाए हुए

असर लखनवी

आप बिक जाए कोई ऐसा ख़रीदार न था

असर लखनवी

आख़िर-ए-कार यही उज़्र जफ़ा का निकला

असर लखनवी

कोई हमदम बना के देखो तुम

असर अकबराबादी

जाने क्यूँ लोग ग़म से डरते हैं

असर अकबराबादी

सीनों में अगर होती कुछ प्यार की गुंजाइश

असद रज़ा

राहें धुआँ धुआँ हैं सफ़र गर्द गर्द है

असद रज़ा

इन अक़्ल के बंदों में आशुफ़्ता-सरी क्यूँ है

असद मुल्तानी

सिर्फ़ कहने को कोई अज़्मत-निशाँ बनता नहीं

असद जाफ़री

रवाँ है क़ाफ़िला-ए-जुस्तुजू किधर मेरा

असद जाफ़री

मलाल-ए-हिज्र नहीं रंज-ए-बे-रुख़ी भी नहीं

असद जाफ़री

कोई दिल-जूई नहीं थी कोई शुनवाई न थी

असद जाफ़री

देखिए अहद-ए-वफ़ा अच्छा नहीं

असद भोपाली

तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा

असद भोपाली

लब ओ रुख़्सार की क़िस्मत से दूरी

असद भोपाली

कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते

असद भोपाली

जब अपने पैरहन से ख़ुशबू तुम्हारी आई

असद भोपाली