Hope Poetry (page 134)

इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया

असद भोपाली

गिराँ गुज़रने लगा दौर-ए-इंतिज़ार मुझे

असद भोपाली

ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा होगा

असद भोपाली

दो-जहाँ से मावरा हो जाएगा

असद भोपाली

सब इक चराग़ के परवाने होना चाहते हैं

असअ'द बदायुनी

आते हैं बर्ग-ओ-बार दरख़्तों के जिस्म पर

असअ'द बदायुनी

जो लोग रातों को जागते थे

असअ'द बदायुनी

हम अहल-ए-ख़ौफ़

असअ'द बदायुनी

एक नज़्म

असअ'द बदायुनी

ये लोग ख़्वाब बहुत कर्बला के देखते हैं

असअ'द बदायुनी

ये धूप छाँव के असरार क्या बताते हैं

असअ'द बदायुनी

यही नहीं कि मिरा घर बदलता जाता है

असअ'द बदायुनी

वक़्त इक दरिया है दरिया सब बहा ले जाएगा

असअ'द बदायुनी

सुख़न-वरी का बहाना बनाता रहता हूँ

असअ'द बदायुनी

शाख़ से फूल से क्या उस का पता पूछती है

असअ'द बदायुनी

सब इक चराग़ के परवाने होना चाहते हैं

असअ'द बदायुनी

मुझे भी वहशत-ए-सहरा पुकार मैं भी हूँ

असअ'द बदायुनी

मिरी अना मिरे दुश्मन को ताज़ियाना है

असअ'द बदायुनी

मिरे शजर तुझे मौसम नया बनाते रहें

असअ'द बदायुनी

मिरे लोग ख़ेमा-ए-सब्र में मिरे शहर गर्द-ए-मलाल में

असअ'द बदायुनी

कहते हैं लोग शहर तो ये भी ख़ुदा का है

असअ'द बदायुनी

हवा हवस के इलाक़े दिखा रही है मुझे

असअ'द बदायुनी

बड़े नादान थे हम रेत को आब-ए-रवाँ समझे

असअ'द बदायुनी

अज़ल के दिन जिन्हें देखा था बज़्म-ए-हुस्न-ए-पिन्हाँ में

आरज़ू सहारनपुरी

वो पलट के जल्द न आएँगे ये अयाँ है तर्ज़-ए-ख़िराम से

आरज़ू लखनवी

ख़िज़ाँ का भेस बना कर बहार ने मारा

आरज़ू लखनवी

ख़मोशी मेरी मअनी-ख़ेज़ थी ऐ आरज़ू कितनी

आरज़ू लखनवी

हमारी नाकामी-ए-वफ़ा ने ज़माने की खोल दी हैं आँखें

आरज़ू लखनवी

दिल की ज़िद इस लिए रख ली थी कि आ जाए क़रार

आरज़ू लखनवी

यूँ दूर दूर दिल से हो हो के दिल-नशीं भी

आरज़ू लखनवी