Hope Poetry (page 196)

ख़्वाहिश सुखाने रक्खी थी कोठे पे दोपहर

आदिल मंसूरी

टूटी लज़्ज़त की ख़ुशबू

आदिल मंसूरी

सितारा सो गया है

आदिल मंसूरी

नज़्म

आदिल मंसूरी

हश्र की सुब्ह दरख़्शाँ हो मक़ाम-ए-महमूद

आदिल मंसूरी

गोल कमरे को सजाता हूँ

आदिल मंसूरी

फ़ैज़

आदिल मंसूरी

आमीन

आदिल मंसूरी

सड़कों पर सूरज उतरा

आदिल मंसूरी

गाँठी है उस ने दोस्ती इक पेश-इमाम से

आदिल मंसूरी

एक क़तरा अश्क का छलका तो दरिया कर दिया

आदिल मंसूरी

दरवाज़ा बंद देख के मेरे मकान का

आदिल मंसूरी

चेहरे पे चमचमाती हुई धूप मर गई

आदिल मंसूरी

बदन पर नई फ़स्ल आने लगी

आदिल मंसूरी

दुम

आदिल लखनवी

ये नहीं वो रहगुज़र कुछ और है

आदिल हयात

सुकून-ए-दिल फ़ना है और मैं हूँ

आदिल हयात

हर इक जवाब की तह में सवाल आएगा

आदिल हयात

हम बहर हाल दिल ओ जाँ से तुम्हारे होते

अदीम हाशमी

तेरे लिए चले थे हम तेरे लिए ठहर गए

अदीम हाशमी

तमाम उम्र की तन्हाई की सज़ा दे कर

अदीम हाशमी

तअल्लुक़ अपनी जगह तुझ से बरक़रार भी है

अदीम हाशमी

शामिल था ये सितम भी किसी के निसाब में

अदीम हाशमी

मेरे रस्ते में भी अश्जार उगाया कीजे

अदीम हाशमी

क्यूँ मिरे लब पे वफ़ाओं का सवाल आ जाए

अदीम हाशमी

कोई पत्थर कोई गुहर क्यूँ है

अदीम हाशमी

किस हवाले से मुझे किस का पता याद आया

अदीम हाशमी

हम बहर-ए-हाल दिल ओ जाँ से तुम्हारे होते

अदीम हाशमी

इक पल बग़ैर देखे उसे क्या गुज़र गया

अदीम हाशमी

बस कोई ऐसी कमी सारे सफ़र में रह गई

अदीम हाशमी