Hope Poetry (page 197)

ऐसा भी नहीं उस से मिला दे कोई आ कर

अदीम हाशमी

आग़ोश-ए-सितम में ही छुपा ले कोई आ कर

अदीम हाशमी

सहरा-ओ-दश्त-ओ-सर्व-ओ-समन का शरीक था

अदील ज़ैदी

जहान-ए-इल्म का बाब-ए-निसाब होते हुए

अदील ज़ैदी

हम ने थामा यक़ीं को गुमाँ छोड़ कर

अदील ज़ैदी

डराएगी भला क्या तेरी गर्दिश आसमाँ मुझ को

अदील ज़ैदी

राहत की जुस्तुजू में ख़ुशी की तलाश में

अदीब सहारनपुरी

वो पौ फटी वो किरन से किरन में आग लगी

अदीब सहारनपुरी

नहीं किसी की तवज्जोह ख़ुद-आगही की तरफ़

अदीब सहारनपुरी

नग़्मा-ए-इश्क़-ए-बुताँ और ज़रा आहिस्ता

अदीब सहारनपुरी

मिरे शौक़-ए-जुस्तुजू का किसे ए'तिबार होता

अदीब सहारनपुरी

इक ख़लिश को हासिल-ए-उम्र-ए-रवाँ रहने दिया

अदीब सहारनपुरी

इक ख़लिश को हासिल-ए-उम्र-ए-रवाँ रहने दिया

अदीब सहारनपुरी

बख़्शे फिर उस निगाह ने अरमाँ नए नए

अदीब सहारनपुरी

वर्ना इंसान मर गया होता

अदा जाफ़री

लोग बे-मेहर न होते होंगे

अदा जाफ़री

जो चराग़ सारे बुझा चुके उन्हें इंतिज़ार कहाँ रहा

अदा जाफ़री

जिस की बातों के फ़साने लिक्खे

अदा जाफ़री

साज़-ए-सुख़न बहाना है

अदा जाफ़री

क्यूँ

अदा जाफ़री

ज़बाँ को हुक्म निगाह-ए-करम को पहचाने

अदा जाफ़री

यही नहीं कि ज़ख़्म-ए-जाँ को चारा-जू मिला नहीं

अदा जाफ़री

वो लम्हा कि ख़ामोशी-ए-शब नग़्मा-सरा थी

अदा जाफ़री

वैसे ही ख़याल आ गया है

अदा जाफ़री

वही ना-सबूरी-ए-आरज़ू वही नक़्श-ए-पा वही जादा है

अदा जाफ़री

उजाला दे चराग़-ए-रहगुज़र आसाँ नहीं होता

अदा जाफ़री

शायद अभी है राख में कोई शरार भी

अदा जाफ़री

निगाह ओट रहूँ कासा-ए-ख़बर में रहूँ

अदा जाफ़री

न बाम-ओ-दश्त न दरिया न कोहसार मिले

अदा जाफ़री

मुझे रंग-ए-ख़्वाब से ज़िंदगी का यक़ीं मिला

अदा जाफ़री