Hope Poetry (page 199)

ये तो नहीं कि बादिया-पैमा न आएगा

अबु मोहम्मद सहर

फूलों की तलब में थोड़ा सा आज़ार नहीं तो कुछ भी नहीं

अबु मोहम्मद सहर

माना अपनी जान को वो भी दिल का रोग लगाएँगे

अबु मोहम्मद सहर

ख़्वाबों का नश्शा है न तमन्ना का सिलसिला

अबु मोहम्मद सहर

जब ये दावे थे कि हर दुख का मुदावा हो गए

अबु मोहम्मद सहर

इश्क़ की सई-ए-बद-अंजाम से डर भी न सके

अबु मोहम्मद सहर

हर ख़ौफ़ हर ख़तर से गुज़रना भी सीखिए

अबु मोहम्मद सहर

अब तक इलाज-ए-रंजिश-ए-बे-जा न कर सके

अबु मोहम्मद सहर

तीर-अंदाजों को अंदाज़ा नहीं

अबसार अब्दुल अली

तुम नज़र क्यूँ चुराए जाते हो

आबरू शाह मुबारक

जलता है अब तलक तिरी ज़ुल्फ़ों के रश्क से

आबरू शाह मुबारक

सैर-ए-बहार-ए-हुस्न ही अँखियों का काम जान

आबरू शाह मुबारक

रखे कोई इस तरह के लालची को कब तलक बहला

आबरू शाह मुबारक

नाज़नीं जब ख़िराम करते हैं

आबरू शाह मुबारक

नालाँ हुआ है जल कर सीने में मन हमारा

आबरू शाह मुबारक

न पावे चाल तेरे की पियारे ये ढलक दरिया

आबरू शाह मुबारक

मत मेहर सेती हाथ में ले दिल हमारे कूँ

आबरू शाह मुबारक

कोयल नीं आ के कोक सुनाई बसंत रुत

आबरू शाह मुबारक

कहें क्या तुम सूँ बे-दर्द लोगो किसी से जी का मरम न पाया

आबरू शाह मुबारक

इश्क़ है इख़्तियार का दुश्मन

आबरू शाह मुबारक

इंसान है तो किब्र सीं कहता है क्यूँ अना

आबरू शाह मुबारक

हम नीं सजन सुना है उस शोख़ के दहाँ है

आबरू शाह मुबारक

हुआ हूँ दिल सेती बंदा पिया की मेहरबानी का

आबरू शाह मुबारक

गुनाहगारों की उज़्र-ख़्वाही हमारे साहिब क़ुबूल कीजे

आबरू शाह मुबारक

दिल नीं पकड़ी है यार की सूरत

आबरू शाह मुबारक

देख तू बे-रहम आशिक़ नीं तुझे छोड़ा नहीं

आबरू शाह मुबारक

बहार आई गली की तरह दिल खोल

आबरू शाह मुबारक

आज यारों को मुबारक हो कि सुब्ह-ए-ईद है

आबरू शाह मुबारक

कुछ है ख़बर फ़रिश्तों के जलते हैं पर कहाँ

अबरार शाहजहाँपुरी

क्या क्या धरे अजूबे हैं शहर-ए-ख़याल में

अबरार हामिद