Hope Poetry (page 65)
अच्छा हुआ मैं वक़्त के मेहवर से कट गया
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
आह को बाद-ए-सबा दर्द को ख़ुशबू लिखना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
जिसे पाने की ख़्वाहिश में जिए थे
फ़य्याज़ तहसीन
तमाशा फिर सर-ए-बाज़ार करना
फ़य्याज़ तहसीन
कभी याद-ए-ख़ुदा कभी इश्क़-ए-बुताँ यूँही सारी उम्र गँवा बैठा
फ़य्याज़ तहसीन
अब आ गए हो तो रफ़्तगाँ को भी याद रखना
फ़य्याज़ तहसीन
शिकवा हम तुझ से भला तेज़ हवा क्या करते
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
राह में उस की चलें और इम्तिहाँ कोई न हो
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
कहानी हो कोई भी तेरा क़िस्सा हो ही जाती है
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
जुगनू हवा में ले के उजाले निकल पड़े
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
वाईपर
फ़े सीन एजाज़
अलमिया-ए-नक़्द
फ़े सीन एजाज़
मिरे घर की ईंटें चुरा ले गया वो
फ़े सीन एजाज़
कोई आँख चुपके चुपके मुझे यूँ निहारती है
फ़े सीन एजाज़
घर की मुश्किल कोई हल चाहती है
फ़े सीन एजाज़
ग़म दुनिया के याद जब आएँ उस की याद भी आने दो
फ़े सीन एजाज़
दिया जला के कोई चाँद पर रखा होगा
फ़े सीन एजाज़
अच्छी-ख़ासी रुस्वाई का सबब होती है
फ़े सीन एजाज़
आँख और नींद के रिश्ते मुझे वापस कर दे
फ़े सीन एजाज़
उस की गली में ज़र्फ़ से बढ़ कर मिला मुझे
फ़व्वाद अहमद
यूँ लगा देख के जैसे कोई अपना आया
फ़ातिमा वसीया जायसी
सुन रहे हैं कान जो कहते हैं सब
फ़ातिमा हसन
कब उस की फ़त्ह की ख़्वाहिश को जीत सकती थी
फ़ातिमा हसन
अधूरे लफ़्ज़ थे आवाज़ ग़ैर-वाज़ेह थी
फ़ातिमा हसन
ज़ख़्मी उँगलियों से एक नज़्म
फ़ातिमा हसन
यादों के सब रंग उड़ा कर तन्हा हूँ
फ़ातिमा हसन
सुकून-ए-दिल के लिए इश्क़ तो बहाना था
फ़ातिमा हसन
रुका जवाब की ख़ातिर न कुछ सवाल किया
फ़ातिमा हसन
क़ुर्बतों में फ़ासले कुछ और हैं
फ़ातिमा हसन
मिरी ज़मीं पे लगी आप के नगर में लगी
फ़ातिमा हसन