Hope Poetry (page 77)

बिल्कुल तुम सा और तुम्हारा लगता हूँ

फख़्र अब्बास

तसव्वुर में कोई आया सुकून-ए-क़ल्ब-ओ-जाँ हो कर

फ़ैज़ी निज़ाम पुरी

फिर ज़बान-ए-इश्क़ चश्म-ए-ख़ूँ-फिशाँ होने लगी

फ़ैज़ी निज़ाम पुरी

कोई तसव्वुर में जल्वा-गर है बहार दिल में समा रही है

फ़ैज़ी निज़ाम पुरी

गुलों के चेहरा-ए-रंगीं पे वो निखार नहीं

फ़ैज़ी निज़ाम पुरी

जानता हूँ कि कई लोग हैं बेहतर मुझ से

फ़ैज़ी

इस लिए दिल बुरा किया ही नहीं

फ़ैज़ी

अच्छा है तू ने इन दिनों देखा नहीं मुझे

फ़ैज़ी

मिरे वजूद को मौजूदगी दिखाती थी

फ़ैज़ान हाशमी

अपने ख़ला में ला कि ये तुम को दिखा रहा हूँ मैं

फ़ैज़ान हाशमी

दुआओं के दिए जब जल रहे थे

फ़ैज़ान आरिफ़

हम ने सहरा को सजाया था गुलिस्ताँ की तरह

फ़ैज़ुल हसन

एक मुद्दत से सर-ए-बाम वो आया भी नहीं

फ़ैज़ुल हसन

दिल जिस का दर्द-ए-इश्क़ का हामिल नहीं रहा

फ़ैज़ुल हसन

मामूली बे-कार समझने वाले मुझ से दूर रहें

फ़ैज़ आलम बाबर

ज़ेर-ए-लब है अभी तबस्सुम-ए-दोस्त

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तेरे क़ौल-ओ-क़रार से पहले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

न जाने किस लिए उम्मीद-वार बैठा हूँ

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

न गुल खिले हैं न उन से मिले न मय पी है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जो नफ़स था ख़ार-ए-गुलू बना जो उठे थे हाथ लहू हुए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

इन में लहू जला हो हमारा कि जान ओ दिल

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़रेब-ए-आरज़ू की सहल-अँगारी नहीं जाती

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

इक तर्ज़-ए-तग़ाफ़ुल है सो वो उन को मुबारक

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदाँ की एक सुब्ह

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदगी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

यास

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

उम्मीद-ए-सहर की बात सुनो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़