Hope Poetry (page 75)
इश्क़ इश्क़ हो शायद हुस्न में फ़ना हो कर
फ़ानी बदायुनी
इब्तिदा-ए-इश्क़ है लुत्फ़-ए-शबाब आने को है
फ़ानी बदायुनी
हम मौत भी आए तो मसरूर नहीं होते
फ़ानी बदायुनी
हो काश वफ़ा वादा-ए-फ़र्दा-ए-क़यामत
फ़ानी बदायुनी
हर साँस के साथ जा रहा हूँ
फ़ानी बदायुनी
हर घड़ी इंक़लाब में गुज़री
फ़ानी बदायुनी
दुनिया-ए-हुस्न-ओ-इश्क़ में किस का ज़ुहूर था
फ़ानी बदायुनी
दिल की काया ग़म ने वो पल्टी कि तुझ सा बन गया
फ़ानी बदायुनी
दिल की हर लर्ज़िश-ए-मुज़्तर पे नज़र रखते हैं
फ़ानी बदायुनी
डरो न तुम कि न सुन ले कहीं ख़ुदा मेरी
फ़ानी बदायुनी
दैर में या हरम में गुज़रेगी
फ़ानी बदायुनी
बिजलियाँ टूट पड़ीं जब वो मुक़ाबिल से उठा
फ़ानी बदायुनी
बे-ज़ौक़-ए-नज़र बज़्म-ए-तमाशा न रहेगी
फ़ानी बदायुनी
बे-ख़ुदी पे था 'फ़ानी' कुछ न इख़्तियार अपना
फ़ानी बदायुनी
बेदाद के ख़ूगर थे फ़रियाद तो क्या करते
फ़ानी बदायुनी
बे-अजल काम न अपना किसी उनवाँ निकला
फ़ानी बदायुनी
अपनी जन्नत मुझे दिखला न सका तू वाइज़
फ़ानी बदायुनी
ऐ मौत तुझ पे उम्र-ए-अबद का मदार है
फ़ानी बदायुनी
ऐ अजल ऐ जान-ए-'फ़ानी' तू ने ये क्या कर दिया
फ़ानी बदायुनी
अदा से आड़ में ख़ंजर के मुँह छुपाए हुए
फ़ानी बदायुनी
अब उन्हें अपनी अदाओं से हिजाब आता है
फ़ानी बदायुनी
अब लब पे वो हंगामा-ए-फ़रियाद नहीं है
फ़ानी बदायुनी
आप से शरह-ए-आरज़ू तो करें
फ़ानी बदायुनी
आह अब तक तो बे-असर न हुई
फ़ानी बदायुनी
सहता रहा जफ़ा-ए-दोस्त कहता रहा अदा-ए-दोस्त
फ़ना निज़ामी कानपुरी
ऐ जल्वा-ए-जानाना फिर ऐसी झलक दिखला
फ़ना निज़ामी कानपुरी
यूँ तिरी तलाश में तेरे ख़स्ता-जाँ चले
फ़ना निज़ामी कानपुरी
यूँ इंतिक़ाम तुझ से फ़स्ल-ए-बहार लेंगे
फ़ना निज़ामी कानपुरी
या रब मिरी हयात से ग़म का असर न जाए
फ़ना निज़ामी कानपुरी
साक़िया तू ने मिरे ज़र्फ़ को समझा क्या है
फ़ना निज़ामी कानपुरी