Hope Poetry (page 73)
तुम्हारा चेहरा तुम्हें हू-ब-हू दिखाऊँगा
फ़राग़ रोहवी
यारो हुदूद-ए-ग़म से गुज़रने लगा हूँ मैं
फ़राग़ रोहवी
नवाह-ए-जाँ में किसी के उतरना चाहा था
फ़राग़ रोहवी
लबों के सामने ख़ाली गिलास रखते हैं
फ़राग़ रोहवी
कभी न सोचा था मैं ने उड़ान भरते हुए
फ़राग़ रोहवी
जिस दिन से कोई ख़्वाहिश-ए-दुनिया नहीं रखता
फ़राग़ रोहवी
हमारे साथ उमीद-ए-बहार तुम भी करो
फ़राग़ रोहवी
दिन में भी हसरत-ए-महताब लिए फिरते हैं
फ़राग़ रोहवी
तिनकों से खेलते ही रहे आशियाँ में हम
फ़ानी बदायुनी
तर्क-ए-उम्मीद बस की बात नहीं
फ़ानी बदायुनी
रूह घबराई हुई फिरती है मेरी लाश पर
फ़ानी बदायुनी
ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
फ़ानी बदायुनी
नहीं ज़रूर कि मर जाएँ जाँ-निसार तेरे
फ़ानी बदायुनी
मुझ तक उस महफ़िल में फिर जाम-ए-शराब आने को है
फ़ानी बदायुनी
कुछ कटी हिम्मत-ए-सवाल में उम्र
फ़ानी बदायुनी
कश्ती-ए-ए'तिबार तोड़ के देख
फ़ानी बदायुनी
इस दर्द का इलाज अजल के सिवा भी है
फ़ानी बदायुनी
इब्तिदा-ए-इश्क़ है लुत्फ़-ए-शबाब आने को है
फ़ानी बदायुनी
दिल-ए-आबाद का 'फ़ानी' कोई मफ़्हूम नहीं
फ़ानी बदायुनी
भर के साक़ी जाम-ए-मय इक और ला और जल्द ला
फ़ानी बदायुनी
ज़ब्त अपना शिआर था न रहा
फ़ानी बदायुनी
ज़बाँ मुद्दआ-आश्ना चाहता हूँ
फ़ानी बदायुनी
यूँ नज़्म-ए-जहाँ दरहम-ओ-बरहम न हुआ था
फ़ानी बदायुनी
ये किस क़यामत की बेकसी है ज़मीं ही अपना न यार मेरा
फ़ानी बदायुनी
वो मश्क़-ए-ख़ू-ए-तग़ाफ़ुल फिर एक बार रहे
फ़ानी बदायुनी
वो कहते हैं कि है टूटे हुए दिल पर करम मेरा
फ़ानी बदायुनी
वो जी गया जो इश्क़ में जी से गुज़र गया
फ़ानी बदायुनी
वाहिमे की ये मश्क़-ए-पैहम क्या
फ़ानी बदायुनी
वा-ए-नादानी ये हसरत थी कि होता दर खुला
फ़ानी बदायुनी
वादी-ए-शौक़ में वारफ़्ता-ए-रफ़्तार हैं हम
फ़ानी बदायुनी