Hope Poetry (page 72)

पहुँच के हम सर-ए-मंज़िल जिन्हें भुला न सके

फ़रीद जावेद

ना-शगुफ़्ता कलियों में शौक़ है तबस्सुम का

फ़रीद जावेद

क्या हो गया कैसी रुत पलटी मिरा चैन गया मिरी नींद गई

फ़रीद जावेद

किस से वफ़ा की है उमीद कौन वफ़ा-शिआर है

फ़रीद जावेद

किस से वफ़ा की है उमीद कौन वफ़ा-शिआ'र है

फ़रीद जावेद

जब भी शम-ए-तरब जलाई है

फ़रीद जावेद

हमारे सामने बेगाना-वार आओ नहीं

फ़रीद जावेद

हमारे सामने बेगाना-वार आओ नहीं

फ़रीद जावेद

अभी मकाँ मैं अभी सू-ए-ला-मकाँ हूँ मैं

फ़रीद जावेद

काग़ज़ के फूल

फ़रीद इशरती

जब तमन्नाएँ मुस्कुराती हैं

फ़रीद इशरती

फ़नकार और मौत

फ़रीद इशरती

बे-बाक अँधेरे

फ़रीद इशरती

ज़ौक़-ए-परवाज़ में साबित हुआ सय्यारों से

फ़रीद इशरती

जला के दामन-ए-हस्ती का तार तार उठा

फ़रीद इशरती

दिल में शगुफ़्ता गुल भी हैं रौशन चराग़ भी

फ़रीद इशरती

वो अक्स-ए-दिल-ए-आश्ना छोड़ आए

फ़राज़ सुल्तानपूरी

निकल के घर से और मैदाँ में आ के

फ़राज़ सुल्तानपूरी

सदा-ए-कुन से भी पहले किसी जहान में थे

फ़राज़ महमूद फ़ारिज़

भले बुझाने की ज़िद पे हवा उड़ी हुई है

फ़राज़ महमूद फ़ारिज़

ज़रा सी रात ढल जाए तो शायद नींद आ जाए

फ़रह इक़बाल

ज़माना झुक गया होता अगर लहजा बदल लेते

फ़रह इक़बाल

वो मेरे बारे में ऐसे भी सोचता कब था

फ़रह इक़बाल

मोहब्बत का दिया ऐसे बुझा था

फ़रह इक़बाल

मिरे हम-रक़्स साए को बिल-आख़िर यूँही ढलना था

फ़रह इक़बाल

कोई जब मिल के मुस्कुराया था

फ़रह इक़बाल

ख़ुद ही दिया जलाती हूँ

फ़रह इक़बाल

हमें तो साथ चलने का हुनर अब तक नहीं आया

फ़रह इक़बाल

देखा पलट के जब भी तो फैला ग़ुबार था

फ़रह इक़बाल

दर्द का समुंदर है सिर्फ़ पार होने तक

फ़रह इक़बाल