Hope Poetry (page 74)
तिरी तिरछी नज़र का तीर है मुश्किल से निकलेगा
फ़ानी बदायुनी
तेरा निगाह-ए-शौक़ कोई राज़-दाँ न था
फ़ानी बदायुनी
ताकीद है कि दीदा-ए-दिल वा करे कोई
फ़ानी बदायुनी
सितम-ईजाद रहोगे सितम-ईजाद रहे
फ़ानी बदायुनी
शबाब-ए-होश कि फ़िल-जुमला यादगार हुई
फ़ानी बदायुनी
क़िस्सा-ए-ज़ीस्त मुख़्तसर करते
फ़ानी बदायुनी
क़तरा दरिया-ए-आश्नाई है
फ़ानी बदायुनी
न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मा'लूम
फ़ानी बदायुनी
मुझ को मिरे नसीब ने रोज़-ए-अज़ल से क्या दिया
फ़ानी बदायुनी
मोहताज-ए-अजल क्यूँ है ख़ुद अपनी क़ज़ा हो जा
फ़ानी बदायुनी
मिज़ाज-ए-दहर में उन का इशारा पाए जा
फ़ानी बदायुनी
मेरे लब पर कोई दुआ ही नहीं
फ़ानी बदायुनी
माया-ए-नाज़-ए-राज़ हैं हम लोग
फ़ानी बदायुनी
मर के टूटा है कहीं सिलसिला-क़ैद-ए-हयात
फ़ानी बदायुनी
मर कर तिरे ख़याल को टाले हुए तो हैं
फ़ानी बदायुनी
मर कर मरीज़-ए-ग़म की वो हालत नहीं रही
फ़ानी बदायुनी
लुत्फ़ ओ करम के पुतले हो अब क़हर ओ सितम का नाम नहीं
फ़ानी बदायुनी
ले ए'तिबार-ए-वादा-ए-फ़र्दा नहीं रहा
फ़ानी बदायुनी
क्यूँ न नैरंग-ए-जुनूँ पर कोई क़ुर्बां हो जाए
फ़ानी बदायुनी
कुछ कम तो हुआ रंज-ए-फ़रावान-ए-तमन्ना
फ़ानी बदायुनी
कुछ बस ही न था वर्ना ये इल्ज़ाम न लेते
फ़ानी बदायुनी
किसी के एक इशारे में किस को क्या न मिला
फ़ानी बदायुनी
ख़ुशी से रंज का बदला यहाँ नहीं मिलता
फ़ानी बदायुनी
ख़ुदा असर से बचाए इस आस्ताने को
फ़ानी बदायुनी
ख़ुद मसीहा ख़ुद ही क़ातिल हैं तो वो भी क्या करें
फ़ानी बदायुनी
जुस्तुजू-ए-नशात-ए-मुबहम क्या
फ़ानी बदायुनी
जीने की है उम्मीद न मरने का यक़ीं है
फ़ानी बदायुनी
जी ढूँढता है घर कोई दोनों जहाँ से दूर
फ़ानी बदायुनी
जज़्ब-ए-दिल जब ब-रू-ए-कार आया
फ़ानी बदायुनी
जब दिल में तिरे ग़म ने हसरत की बना डाली
फ़ानी बदायुनी