Hope Poetry (page 71)
बीमार हो गया हूँ शिफा-ख़ाना चाहिए
फ़रहत एहसास
बादल इस बार जो उस शहर पे छाए हुए हैं
फ़रहत एहसास
औरों का सारा काम मुझे दे दिया गया
फ़रहत एहसास
अहल-ए-बदन को इश्क़ है बाहर की कोई चीज़
फ़रहत एहसास
आया ज़रा सी देर रहा ग़ुल गया बदन
फ़रहत एहसास
गर दुआ भी कोई चीज़ है तो दुआ के हवाले किया
फ़रहत अब्बास शाह
शहर-दर-शहर दीदा-वर भटके
फ़रहत अब्बास
जल्वा है वो कि ताब-ए-नज़र तक नहीं रही
फ़रहत अब्बास
हम से मिल कर कोई गुफ़्तुगू कीजिए
फ़रहत अब्बास
उन्हें गुमाँ कि मुझे उन से रब्त है 'सालिम'
फ़रहान सालिम
शौक़-ए-बेहद ने किसी गाम ठहरने न दिया
फ़रहान सालिम
मता-ए-दर्द मआल-ए-हयात है शायद
फ़रहान सालिम
ये क्या हुआ कि सभी अब तो दाग़ जलने लगे
फ़रहान सालिम
तू मिरी इब्तिदा तू मिरी इंतिहा मैं समुंदर हूँ तू साहिलों की हवा
फ़रहान सालिम
शुहूद-ए-दिल-ज़दगाँ मंज़रों में रख आना
फ़रहान सालिम
शौक़ आसूदा-ए-तहलील-ए-मुअम्मा न हुआ
फ़रहान सालिम
मिरे चराग़ो मिरा गंज-ए-बे-कराँ ले लो
फ़रहान सालिम
मता-ए-दर्द मआल-ए-हयात है शायद
फ़रहान सालिम
खो बैठी है सारे ख़द-ओ-ख़ाल अपनी ये दुनिया
फ़रहान सालिम
आम है इज़्न कि जो चाहो हवा पर लिख दो
फ़रहान सालिम
किसी पे करना नहीं ए'तिबार मेरी तरह
फ़रीद परबती
तमन्ना अपनी उन पर आश्कारा कर रहा हूँ मैं
फ़रीद परबती
सिकंदर हूँ तलाश-ए-आब-ए-हैवाँ रोज़ करता हूँ
फ़रीद परबती
रग-ओ-पै में सरायत कर गया वो
फ़रीद परबती
किसी पे करना नहीं ए'तिबार मेरी तरह
फ़रीद परबती
हमा-जिहत मिरी तलब जिस की मिसाल अब नहीं
फ़रीद परबती
हमें भी अपनी तबाही पे रंज होता है
फ़रीद जावेद
ये कहाँ से मौज-ए-तरब उठी कि मलाल दिल से निकल गए
फ़रीद जावेद
ये कहाँ से मौज-ए-तरब उठी कि मलाल दिल से निकल गए
फ़रीद जावेद
पहुँच के हम सर-ए-मंज़िल जिन्हें भुला न सके
फ़रीद जावेद