Hope Poetry (page 69)
नहीं है अब कोई रस्ता नहीं है
फ़रहत शहज़ाद
जब तक चराग़-ए-शाम-ए-तमन्ना जले चलो
फ़रहत शहज़ाद
आँख को जकड़े थे कल ख़्वाब अज़ाबों के
फ़रहत शहज़ाद
था पा-शिकस्ता आँख मगर देखती तो थी
फ़रहत क़ादरी
जब हर नज़र हो ख़ुद ही तजल्ली-नुमा-ए-ग़म
फ़रहत क़ादरी
आई ख़िज़ाँ चमन में गए दिन बहार के
फ़रहत क़ादरी
ढूँडेंगे हर इक चीज़ में जीने की उमंगें
फ़रहत नदीम हुमायूँ
न दौलत की तलब थी और न दौलत चाहिए है
फ़रहत नदीम हुमायूँ
कोई अहद-ए-वफ़ा भूला हुआ हूँ
फ़रहत नदीम हुमायूँ
है वही एक मेरे सिवा और मैं
फ़रहत नदीम हुमायूँ
अब ज़िंदगी रो रो के गुज़ारेंगे नहीं हम
फ़रहत नदीम हुमायूँ
वो बहकी निगाहें क्या कहिए वो महकी जवानी क्या कहिए
फ़रहत कानपुरी
मुँह-बोला बोल जगत का है जो मन में रहे सो अपना है
फ़रहत कानपुरी
कुछ तो वुफ़ूर-ए-शौक़ में बाइ'स-ए-इम्तियाज़ हो
फ़रहत कानपुरी
जो कुछ भी है नज़र में सो वहम-ए-नुमूद है
फ़रहत कानपुरी
इक ख़लिश सी है मुझे तक़दीर से
फ़रहत कानपुरी
फिर सोच के ये सब्र किया अहल-ए-हवस ने
फ़रहत एहसास
हिज्र ओ विसाल चराग़ हैं दोनों तन्हाई के ताक़ों में
फ़रहत एहसास
ना-रसाई
फ़रहत एहसास
मामूल
फ़रहत एहसास
ख़ुद-आगही
फ़रहत एहसास
हमवारी
फ़रहत एहसास
गुनाहों की धुँद
फ़रहत एहसास
ज़मीं से अर्श तलक सिलसिला हमारा भी था
फ़रहत एहसास
ये बाग़ ज़िंदा रहे ये बहार ज़िंदा रहे
फ़रहत एहसास
वो महफ़िलें पुरानी अफ़्साना हो रही हैं
फ़रहत एहसास
तुझे ख़बर हो तो बोल ऐ मिरे सितारा-ए-शब
फ़रहत एहसास
तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता
फ़रहत एहसास
तेरा भला हो तू जो समझता है मुझ को ग़ैर
फ़रहत एहसास
तन्हाई के आब-ए-रवाँ के साहिल पर बैठा हूँ मैं
फ़रहत एहसास