Islamic Poetry (page 11)

आँखों में बस रहा है अदा के बग़ैर भी

हसन नईम

दिल लुटेगा जहाँ ख़फ़ा होगा

हसन कमाल

तिरी जुदाई ने ये क्या बना दिया है मुझे

हसन जमील

उन का जल्वा नहीं देखा जाता

हसन बरेलवी

राज़-ए-दिल लाते हैं ज़बाँ तक हम

हसन बरेलवी

मिरे मरने से तुम को फ़िक्र ऐ दिलदार कैसी है

हसन बरेलवी

किस ने सुनाया और सुनाया तो क्या सुना

हसन बरेलवी

आईना तुम्हारे नक़्श-ए-पा का

हसन बरेलवी

सफ़ीने डूब गए कितने दिल के सागर में

हसन अख्तर जलील

ये रात काश इसी दिलकशी से ढलती रहे

हसन अख्तर जलील

ये रात काश इसी दिलकशी से ढलती रहे

हसन अख्तर जलील

शब की दहलीज़ से किस हाथ ने फेंका पत्थर

हसन अख्तर जलील

ऐ ख़ुदा इंसान की तक़्सीम-दर-तक़्सीम देख

हसन आबिदी

पल रहे हैं कितने अंदेशे दिलों के दरमियाँ

हसन आबिदी

सुनहरे ख़्वाब आँखों में बुना करते थे हम दोनों

हसन अब्बासी

विसाल-घड़ियों में रेज़ा रेज़ा बिखर रहे हैं

हसन अब्बास रज़ा

विसाल-घड़ियों में रेज़ा रेज़ा बिखर रहे हैं

हसन अब्बास रज़ा

मकीं यहीं का है लेकिन मकाँ से बाहर है

हसन अब्बास रज़ा

कल शब क़सम ख़ुदा की बहुत डर लगा हमें

हसन अब्बास रज़ा

सोच का धारा

हसन आबिद

हसरत भरी नज़र से वो देखता है मुझ को

हार्श बरहम भट

आओ जीने की बातें करें

हारिस ख़लीक़

ज़िंदगी अब रहे ख़ता कब तक

हरी मेहता

शैख़ ओ पंडित धर्म और इस्लाम की बातें करें

हरी चंद अख़्तर

शबाब आया किसी बुत पर फ़िदा होने का वक़्त आया

हरी चंद अख़्तर

भरोसा किस क़दर है तुझ को 'अख़्तर' उस की रहमत पर

हरी चंद अख़्तर

अगर तेरी ख़ुशी है तेरे बंदों की मसर्रत में

हरी चंद अख़्तर

सुना कर हाल क़िस्मत आज़मा कर लौट आए हैं

हरी चंद अख़्तर

शैख़ ओ पंडित धर्म और इस्लाम की बातें करें

हरी चंद अख़्तर

शबाब आया किसी बुत पर फ़िदा होने का वक़्त आया

हरी चंद अख़्तर