Islamic Poetry (page 14)
वहशत-ए-दिल ने किया है वो बयाबाँ पैदा
हैदर अली आतिश
उन्नाब-ए-लब का अपने मज़ा कुछ न पूछिए
हैदर अली आतिश
तेरी जो याद ऐ दिल-ख़्वाह भूला
हैदर अली आतिश
ताक़-ए-अबरू हैं पसंद-ए-तब्अ इक दिल-ख़्वाह के
हैदर अली आतिश
सूरत से इस की बेहतर सूरत नहीं है कोई
हैदर अली आतिश
सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या
हैदर अली आतिश
शब-ए-वस्ल थी चाँदनी का समाँ था
हैदर अली आतिश
सर काट के कर दीजिए क़ातिल के हवाले
हैदर अली आतिश
सब्ज़ा बाला-ए-ज़क़न दुश्मन है ख़ल्क़ुल्लाह का
हैदर अली आतिश
रुख़ ओ ज़ुल्फ़ पर जान खोया किया
हैदर अली आतिश
रुजूअ बंदा की है इस तरह ख़ुदा की तरफ़
हैदर अली आतिश
मिरे दिल को शौक़-ए-फ़ुग़ाँ नहीं मिरे लब तक आती दुआ नहीं
हैदर अली आतिश
मगर उस को फ़रेब-ए-नर्गिस-ए-मस्ताना आता है
हैदर अली आतिश
ख़ार मतलूब जो होवे तो गुलिस्ताँ माँगूँ
हैदर अली आतिश
काबा ओ दैर में है किस के लिए दिल जाता
हैदर अली आतिश
जौहर नहीं हमारे हैं सय्याद पर खुले
हैदर अली आतिश
जब के रुस्वा हुए इंकार है सच बात में क्या
हैदर अली आतिश
जाँ-बख़्श लब के इश्क़ में ईज़ा उठाइए
हैदर अली आतिश
इस शश-जिहत में ख़ूब तिरी जुस्तुजू करें
हैदर अली आतिश
इंसाफ़ की तराज़ू में तौला अयाँ हुआ
हैदर अली आतिश
हवा-ए-दौर-ए-मय-ए-ख़ुश-गवार राह में है
हैदर अली आतिश
है जब से दस्त-ए-यार में साग़र शराब का
हैदर अली आतिश
ग़म नहीं गो ऐ फ़लक रुत्बा है मुझ को ख़ार का
हैदर अली आतिश
ग़ैरत-ए-महर रश्क-ए-माह हो तुम
हैदर अली आतिश
फ़र्त-ए-शौक़ उस बुत के कूचे में लगा ले जाएगा
हैदर अली आतिश
फ़रेब-ए-हुस्न से गब्र-ओ-मुसलमाँ का चलन बिगड़ा
हैदर अली आतिश
दीवानगी ने क्या क्या आलम दिखा दिए हैं
हैदर अली आतिश
दिल शहीद-ए-रह-ए-दामान न हुआ था सो हुआ
हैदर अली आतिश
दिल की कुदूरतें अगर इंसाँ से दूर हों
हैदर अली आतिश
दौलत-ए-हुस्न की भी है क्या लूट
हैदर अली आतिश