Islamic Poetry (page 58)
साफ़ कहते हो मगर कुछ नहीं खुलता कहना
अमीर मीनाई
न बेवफ़ाई का डर था न ग़म जुदाई का
अमीर मीनाई
मिरे बस में या तो या-रब वो सितम-शिआर होता
अमीर मीनाई
मैं रो के आह करूँगा जहाँ रहे न रहे
अमीर मीनाई
जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का
अमीर मीनाई
हम-सर-ए-ज़ुल्फ़ क़द-ए-हूर-ए-शमाइल ठहरा
अमीर मीनाई
दिल जुदा माल जुदा जान जुदा लेते हैं
अमीर मीनाई
चुप भी हो बक रहा है क्या वाइज़
अमीर मीनाई
चाँद सा चेहरा नूर की चितवन माशा-अल्लाह माशा-अल्लाह
अमीर मीनाई
बात करने में तो जाती है मुलाक़ात की रात
अमीर मीनाई
शहर में सारे चराग़ों की ज़िया ख़ामोश है
अमीर इमाम
अब इस जहान-ए-बरहना का इस्तिआरा हुआ
अमीर इमाम
इस दौर से ख़ुलूस मोहब्बत वफ़ा न माँग
अमीर अहमद ख़ुसरव
है नूर-ए-ख़ुदा भी यहाँ इरफ़ान-ए-ख़ुदा भी
अमीक़ हनफ़ी
किसी मकाँ के दरीचे को वा तो होना था
अमीन राहत चुग़ताई
नुमूद-ए-रंग-ओ-बू ने मार डाला
अमीन हज़ीं
लाले पड़े हैं जान के जीने का एहतिमाम कर
अमीन हज़ीं
कहीं सानेहे मिलेंगे कहीं हादिसा मिलेगा
अम्बर वसीम इलाहाबादी
हैराँ मैं पहली बार हुआ ज़िंदगी में कल
अम्बर वसीम इलाहाबादी
अयाँ दोनों से तक्मील-ए-जहाँ है
अंबरीन हसीब अंबर
जोश-ए-तकमील-ए-तमन्ना है ख़ुदा ख़ैर करे
अमर सिंह फ़िगार
जी चाहता है साने-ए-क़ुदरत पे हूँ निसार
अमानत लखनवी
रवाँ दवाँ नहीं याँ अश्क चश्म-ए-तर की तरह
अमानत लखनवी
दिखलाए ख़ुदा उस सितम-ईजाद की सूरत
अमानत लखनवी
तुम ऐसे कौन ख़ुदा हो कि उम्र भर तुम से
अल्ताफ़ हुसैन हाली
माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत
अल्ताफ़ हुसैन हाली
जानवर आदमी फ़रिश्ता ख़ुदा
अल्ताफ़ हुसैन हाली
नशात-ए-उमीद
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हुब्ब-ए-वतन
अल्ताफ़ हुसैन हाली
बरखा-रुत
अल्ताफ़ हुसैन हाली