Islamic Poetry (page 56)

क्या कहिए रू-ए-हुस्न पे आलम नक़ाब का

अंदलीब शादानी

कोई अदा-शनास-ए-मोहब्बत हमें बताए

अंदलीब शादानी

सर-ए-महशर यही पूछूँगा ख़ुदा से पहले

आनंद नारायण मुल्ला

मैं फ़क़त इंसान हूँ हिन्दू मुसलमाँ कुछ नहीं

आनंद नारायण मुल्ला

ख़ुदा जाने दुआ थी या शिकायत लब पे बिस्मिल के

आनंद नारायण मुल्ला

ज़िंदगी गो कुश्ता-ए-आलाम है

आनंद नारायण मुल्ला

सर-ए-महशर यही पूछूँगा ख़ुदा से पहले

आनंद नारायण मुल्ला

सर-ए-महशर यही पूछूँगा ख़ुदा से पहले

आनंद नारायण मुल्ला

उठ

अमजद नजमी

उन के वा'दों का हाल क्या कहिए

अमजद नजमी

नहीं कुछ इंतिहा अफ़्सुर्दगी की

अमजद नजमी

उस ने आहिस्ता से जब पुकारा मुझे

अमजद इस्लाम अमजद

थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी

अमजद इस्लाम अमजद

तेरा ये लुत्फ़ किसी ज़ख़्म का उन्वान न हो

अमजद इस्लाम अमजद

सैंकड़ों ही रहनुमा हैं रास्ता कोई नहीं

अमजद इस्लाम अमजद

लहू में रंग लहराने लगे हैं

अमजद इस्लाम अमजद

अगरचे कोई भी अंधा नहीं था

अमजद इस्लाम अमजद

ग़रज़ पड़ने पे उस से माँगता है

अमित शर्मा मीत

ख़ुदा की कौन सी है राह बेहतर जानता है

अमित अहद

दिमाग़ दे जो ख़ुदा गुलशन-ए-मोहब्बत में

अमीरुल्लाह तस्लीम

वस्ल में बिगड़े बने यार के अक्सर गेसू

अमीरुल्लाह तस्लीम

वस्ल की शब भी अदा-ए-रस्म-ए-हिरमाँ में रहा

अमीरुल्लाह तस्लीम

शमीम-ए-यार न जब तक चमन में छू आए

अमीरुल्लाह तस्लीम

करो न देर जहाँ में जहाँ से आगे चलो

अमीरुल्लाह तस्लीम

चाहता हूँ पहले ख़ुद-बीनी से मौत आए मुझे

अमीरुल्लाह तस्लीम

भूले से भी न जानिब-ए-अग़्यार देखना

अमीरुल्लाह तस्लीम

ख़्वाब जो बिखर गए

आमिर उस्मानी

दर्द बढ़ता गया जितने दरमाँ किए प्यास बढ़ती गई जितने आँसू पिए

आमिर उस्मानी

हम ख़ुदा भी मान लेंगे आप को

आमिर मौसवी

ए'तिबार-ए-शौक़ इक धोका सही

आमिर मौसवी