Islamic Poetry (page 57)

ज़िंदगी अपना सफ़र तय तो करेगी लेकिन

अमीता परसुराम 'मीता'

रक़ीब-ए-जाँ नज़र का नूर हो जाए तो क्या कीजे

अमीता परसुराम 'मीता'

न तो ख़ौफ़ रोज़-ए-जज़ा का हो वही इश्क़ है

अमीता परसुराम 'मीता'

मुझ से बच बच के चली है दुनिया

अमीर क़ज़लबाश

मिरे घर में तो कोई भी नहीं है

अमीर क़ज़लबाश

ज़बाँ है मगर बे-ज़बानों में है

अमीर क़ज़लबाश

यकुम जनवरी है नया साल है

अमीर क़ज़लबाश

उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी

अमीर क़ज़लबाश

नज़र आने से पहले डर रहा हूँ

अमीर क़ज़लबाश

नक़्श पानी पे बना हो जैसे

अमीर क़ज़लबाश

मिरे हाल पर मेहरबानी करे

अमीर क़ज़लबाश

कहीं सलीब कहीं कर्बला नज़र आए

अमीर क़ज़लबाश

जंग जारी है ख़ानदानों में

अमीर क़ज़लबाश

जाने ये किस की बनाई हुई तस्वीरें हैं

अमीर क़ज़लबाश

हर रहगुज़र में काहकशाँ छोड़ जाऊँगा

अमीर क़ज़लबाश

हर एक हाथ में पत्थर दिखाई देता है

अमीर क़ज़लबाश

हाँ ये तौफ़ीक़ कभी मुझ को ख़ुदा देता था

अमीर क़ज़लबाश

चलो कि ख़ुद ही करें रू-नुमाइयाँ अपनी

अमीर क़ज़लबाश

बसर होना बहुत दुश्वार सा है

अमीर क़ज़लबाश

ये भी इक बात है अदावत की

अमीर मीनाई

तरफ़-ए-काबा न जा हज के लिए नादाँ है

अमीर मीनाई

किसी रईस की महफ़िल का ज़िक्र ही क्या है

अमीर मीनाई

ख़ुदा ने नेक सूरत दी तो सीखो नेक बातें भी

अमीर मीनाई

काबा-ए-रुख़ की तरफ़ पढ़नी है आँखों से नमाज़

अमीर मीनाई

जो चाहिए सो माँगिये अल्लाह से 'अमीर'

अमीर मीनाई

अल्लाह-री नज़ाकत-ए-जानाँ कि शेर में

अमीर मीनाई

अल्लाह-रे सादगी नहीं इतनी उन्हें ख़बर

अमीर मीनाई

वादा-ए-वस्ल और वो कुछ बात है

अमीर मीनाई

उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ

अमीर मीनाई

तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है

अमीर मीनाई