Islamic Poetry (page 54)
अहद-ए-हाज़िर इक मशीन और उस का कारिंदा हूँ मैं
अनवर सदीद
आप करते जो एहतिराम-ए-बुताँ
अनवर साबरी
आज़ादी के दीवाने
अनवर साबरी
ज़ुल्मतों में रौशनी की जुस्तुजू करते रहो
अनवर साबरी
ज़िंदगी के हसीं बहाने से
अनवर साबरी
उम्र गुज़री है इल्तिजा करते
अनवर साबरी
रहते हुए क़रीब जुदा हो गए हो तुम
अनवर साबरी
दौर-ए-हाज़िर हो गया है इस क़दर कम-आश्ना
अनवर साबरी
यहाँ काँप जाते हैं फ़लसफ़े ये बड़ा अजीब मक़ाम है
अनवर मिर्ज़ापुरी
वादा-ए-शाम-ए-फ़र्दा पे ऐ दिल मुझे गर यक़ीं ही न आए तो मैं क्या करूँ
अनवर मिर्ज़ापुरी
रुख़ से पर्दा उठा दे ज़रा साक़िया बस अभी रंग-ए-महफ़िल बदल जाएगा
अनवर मिर्ज़ापुरी
मस्जिद का ये माइक जो उठा लाए हो ऐ 'अनवर'
अनवर मसूद
तय हो गया है मसअला जब इंतिसाब का
अनवर मसूद
दरमियाँ गर न तिरा वादा-ए-फ़र्दा होता
अनवर मसूद
उतरी शाम तो बरसा पानी या अल्लाह
अनवर ख़ान
क़याम-गाह न कोई न कोई घर मेरा
अनवर जलालपुरी
मैं हर बे-जान हर्फ़-ओ-लफ़्ज़ को गोया बनाता हूँ
अनवर जलालपुरी
अल्लाह-रे फ़र्त-ए-शौक़-ए-असीरी के शौक़ में
अनवर देहलवी
देखा जो मर्ग तो मरना ज़ियाँ न था
अनवर देहलवी
आँखें दिखाईं ग़ैर को मेरी ख़ता के साथ
अनवर देहलवी
ख़ुदा भी मेरी तरह बा-कमाल ऐसा था
अनवर महमूद खालिद
ये दिल ही जानता है फिर कहाँ कहाँ भटके
अनुभव गुप्ता
क्या ख़बर थी कि तिरे साथ ये दुनिया होगी
अंजुम सिद्दीक़ी
उस ख़ुदा की तलाश है 'अंजुम'
अंजुम सलीमी
रौशनी भी नहीं हवा भी नहीं
अंजुम सलीमी
जब ख़ुदा भी नहीं था साथ मरे
अंजुम सलीमी
टूटे हुए प्याले
अंजुम सलीमी
तन्हाई का सफ़रनामा
अंजुम सलीमी
सारा शगुफ़्ता
अंजुम सलीमी
इंहिराफ़
अंजुम सलीमी