Islamic Poetry (page 53)

यही होना था और हुआ जानाँ

आरिफ़ इशतियाक़

आख़िरी ख़त मुझे मिला तेरा

आरिफ़ इशतियाक़

ज़ख़्म सब उस को दिखा कर रक़्स कर

आरिफ़ इमाम

कुछ ऐसे ज़ख़्म-ए-ज़माना का इंदिमाल किया

आरिफ़ इमाम

वो कारवान-ए-बहाराँ कि बे-दरा होगा

आरिफ़ अब्दुल मतीन

मैं जिस को राह दिखाऊँ वही हटाए मुझे

आरिफ़ अब्दुल मतीन

ढूँढता हूँ सर-ए-सहरा-ए-तमन्ना ख़ुद को

आरिफ़ अब्दुल मतीन

'आरिफ़' अज़ल से तेरा अमल मोमिनाना था

आरिफ़ अब्दुल मतीन

या ख़ुदा कुछ तो दर्द कम कर दे

आराधना प्रसाद

बावरे मन की बावरी ख़ुशबू

आराधना प्रसाद

शायद कोई कमी मेरे अंदर कहीं पे है

अक़ील शादाब

उन से भी कहाँ मेरी हिमायत में हिला सर

अक़ील नोमानी

मुहीत-ए-रहमत है जोश-अफ़ज़ा हुई है अब्र-ए-सख़ा की आमद

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

इश्क़ पर दाना नहीं मोहताज-ए-तहरीक-ए-जमाल

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

'शुऊर' तुम ने ख़ुदा जाने क्या किया होगा

अनवर शऊर

ये ख़ुद को देखते रहने की है जो ख़ू मुझ में

अनवर शऊर

उबूर कर न सके हम हदें ही ऐसी थीं

अनवर शऊर

टूटा तिलिस्म-ए-वक़्त तो क्या देखता हूँ मैं

अनवर शऊर

'शुऊर' वक़्त पे दिल की दवा हुई होती

अनवर शऊर

शक नहीं है हमें उस बुत के ख़ुदा होने में

अनवर शऊर

पियो कि मा-हसल-ए-होश किस ने देखा है

अनवर शऊर

कड़ा है दिन बड़ी है रात जब से तुम नहीं आए

अनवर शऊर

हवस बला की मोहब्बत हमें बला की है

अनवर शऊर

बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है

अनवर शऊर

अगरचे आइना-ए-दिल में है क़याम उस का

अनवर शऊर

लेकिन

अनवर सेन रॉय

रंगीं बना के दामन-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर को मैं

अनवर सहारनपुरी

जल्वे दिखाए यार ने अपनी हरीम-ए-नाज़ में

अनवर सहारनपुरी

उस की अना के बुत को बड़ा कर के देखते

अनवर सदीद

सफ़ीना ले गए मौजों की गर्म-जोशी में

अनवर सदीद