Islamic Poetry (page 51)

हवा के पास बस इक ताज़ियाना होता है

असअ'द बदायुनी

हवा हवस के इलाक़े दिखा रही है मुझे

असअ'द बदायुनी

अज़ल के दिन जिन्हें देखा था बज़्म-ए-हुस्न-ए-पिन्हाँ में

आरज़ू सहारनपुरी

लालच भरी मोहब्बत नज़रों से गिर न जाए

आरज़ू लखनवी

देखें महशर में उन से क्या ठहरे

आरज़ू लखनवी

अल्लाह अल्लाह हुस्न की ये पर्दा-दारी देखिए

आरज़ू लखनवी

तलाश-ए-रंग में आवारा मिस्ल-ए-बू हूँ मैं

आरज़ू लखनवी

मिरे जोश-ए-ग़म की है अजब कहानी

आरज़ू लखनवी

किसी गुमान-ओ-यक़ीं की हद में वो शोख़-ए-पर्दा-नशीं नहीं है

आरज़ू लखनवी

करम उन का ख़ुद है बढ़ कर मिरी हद्द-ए-इल्तिजा से

आरज़ू लखनवी

कहीं सर पटकते दीवाने कहीं पर झुलसते परवाने

आरज़ू लखनवी

जो बुत है यहाँ अपनी जा एक ही है

आरज़ू लखनवी

दिल मुकद्दर है आईना-रू का

आरज़ू लखनवी

देखें महशर में उन से क्या ठहरे

आरज़ू लखनवी

आग़ाज़-ए-आशिक़ी का अल्लाह रे ज़माना

अर्शी भोपाली

ख़ुदी के ज़ो'म में ऐसा वो मुब्तला हुआ है

अरशद महमूद अरशद

तिरे ख़याल से फिर आँख मेरी पुर-नम है

अरशद लतीफ़

ज़िम्मेदारी

अरशद कमाल

ज़माना कुछ भी कहे तेरी आरज़ू कर लूँ

अरशद कमाल

उस का अंजाम भला हो कि बुरा हो कुछ हो

अरशद जमाल हश्मी

आँखों में ख़्वाब रख दिए ता'बीर छीन ली

अरशद जमाल हश्मी

ख़ुदा-हाफ़िज़ है अब ऐ ज़ाहिदो इस्लाम-ए-आशिक़ का

अरशद अली ख़ान क़लक़

करो तुम मुझ से बातें और मैं बातें करूँ तुम से

अरशद अली ख़ान क़लक़

हुआ मैं रिंद-मशरब ख़ाक मर कर इस तमन्ना में

अरशद अली ख़ान क़लक़

बुत-परस्ती में भी भूली न मुझे याद-ए-ख़ुदा

अरशद अली ख़ान क़लक़

ये जी में आता है जल जल के हर ज़माँ नासेह

अरशद अली ख़ान क़लक़

यार के नर्गिस-ए-बीमार का बीमार रहा

अरशद अली ख़ान क़लक़

सोते हैं फैल फैल के सारे पलंग पर

अरशद अली ख़ान क़लक़

सितम वो तुम ने किए भूले हम गिला दिल का

अरशद अली ख़ान क़लक़

शरफ़ इंसान को कब ज़िल्ल-ए-हुमा देता है

अरशद अली ख़ान क़लक़