Islamic Poetry (page 50)

कोई छोटा यहाँ कोई बड़ा है

असग़र वेलोरी

कहने आए थे कुछ कहा ही नहीं

असग़र वेलोरी

ज़िंदगी मौत का आईना

असग़र नदीम सय्यद

ख़ुदा बदल न सका आदमी को आज भी 'होश'

असग़र मेहदी होश

छुट जाए अगर दामन-ए-कौनैन तो क्या ग़म

असग़र गोंडवी

अल्लाह-रे चश्म-ए-यार की मोजिज़-बयानियाँ

असग़र गोंडवी

ज़ौक़-ए-सरमस्ती को महव-ए-रू-ए-जानाँ कर दिया

असग़र गोंडवी

ये क्या कहा कि ग़म-ए-इश्क़ नागवार हुआ

असग़र गोंडवी

तिरे जल्वों के आगे हिम्मत-ए-शरह-ओ-बयाँ रख दी

असग़र गोंडवी

मस्ती में फ़रोग़-ए-रुख़-ए-जानाँ नहीं देखा

असग़र गोंडवी

ख़ुदा जाने कहाँ है 'असग़र'-ए-दीवाना बरसों से

असग़र गोंडवी

गुम कर दिया है दीद ने यूँ सर-ब-सर मुझे

असग़र गोंडवी

जाने लगे हैं अब दम-ए-सर्द आसमाँ तलक

असीर लखनवी

ख़ुदा की देन है जिस को नसीब हो जाए

असर सहबाई

निगह-ए-शौक़ को यूँ आइना-सामानी दे

असर लखनवी

हम-साई

असद जाफ़री

कोई दिल-जूई नहीं थी कोई शुनवाई न थी

असद जाफ़री

लब ओ रुख़्सार की क़िस्मत से दूरी

असद भोपाली

कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते

असद भोपाली

जब अपने पैरहन से ख़ुशबू तुम्हारी आई

असद भोपाली

वहाँ भी मुझ को ख़ुदा सर-बुलंद रखता है

असअ'द बदायुनी

ये लोग ख़्वाब बहुत कर्बला के देखते हैं

असअ'द बदायुनी

ये धूप छाँव के असरार क्या बताते हैं

असअ'द बदायुनी

वक़्त इक दरिया है दरिया सब बहा ले जाएगा

असअ'द बदायुनी

सुख़न-वरी का बहाना बनाता रहता हूँ

असअ'द बदायुनी

शाख़ से फूल से क्या उस का पता पूछती है

असअ'द बदायुनी

रास्ता कोई सफ़र कोई मसाफ़त कोई

असअ'द बदायुनी

मिरे लोग ख़ेमा-ए-सब्र में मिरे शहर गर्द-ए-मलाल में

असअ'द बदायुनी

कहते हैं लोग शहर तो ये भी ख़ुदा का है

असअ'द बदायुनी

जिसे न मेरी उदासी का कुछ ख़याल आया

असअ'द बदायुनी