Islamic Poetry (page 48)

वो ग़ज़ल की किताब है प्यारे

अतीक़ अंज़र

किसी ने भेजा है ख़त प्यार और वफ़ा लिख कर

अतीक़ अंज़र

तराश और भी अपने तसव्वुर-ए-रब को

अता तुराब

नुमू-पज़ीर हूँ हर दम कि मुझ में दम है अभी

अता तुराब

जागते ही नज़र अख़बार में खो जाती है

अता आबिदी

ये मेरे इश्क़ की मजबूरियाँ मआज़-अल्लाह

असरार-उल-हक़ मजाज़

हिन्दू चला गया न मुसलमाँ चला गया

असरार-उल-हक़ मजाज़

डुबो दी थी जहाँ तूफ़ाँ ने कश्ती

असरार-उल-हक़ मजाज़

उन का जश्न-ए-साल-गिरह

असरार-उल-हक़ मजाज़

सरमाया-दारी

असरार-उल-हक़ मजाज़

साक़ी

असरार-उल-हक़ मजाज़

सानेहा

असरार-उल-हक़ मजाज़

ख़्वाब-ए-सहर

असरार-उल-हक़ मजाज़

ख़िराज-अक़ीदत

असरार-उल-हक़ मजाज़

दिल्ली से वापसी

असरार-उल-हक़ मजाज़

अँधेरी रात का मुसाफ़िर

असरार-उल-हक़ मजाज़

आज की रात

असरार-उल-हक़ मजाज़

यूँही बैठे रहो बस दर्द-ए-दिल से बे-ख़बर हो कर

असरार-उल-हक़ मजाज़

ये जहाँ बारगह-ए-रित्ल-ए-गिराँ है साक़ी

असरार-उल-हक़ मजाज़

सीने में उन के जल्वे छुपाए हुए तो हैं

असरार-उल-हक़ मजाज़

ख़ामुशी का तो नाम होता है

असरार-उल-हक़ मजाज़

करिश्मा-साजी-ए-दिल देखता हूँ

असरार-उल-हक़ मजाज़

कमाल-ए-इश्क़ है दीवाना हो गया हूँ मैं

असरार-उल-हक़ मजाज़

दिल-ए-ख़ूँ-गश्ता-ए-जफ़ा पे कहीं

असरार-उल-हक़ मजाज़

आशिक़ी जाँ-फ़ज़ा भी होती है

असरार-उल-हक़ मजाज़

सीना-ए-संग में ढूँढता है गुदाज़

असरारुल हक़ असरार

तक़द्दुस-ए-मआब

असरार जामई

चमचे की दुआ

असरार जामई

वो शख़्स फिर कहानी का उन्वान बन गया

असरा रिज़वी

मैं सच तो कह दूँ पर उस को कहीं बुरा न लगे

असरा रिज़वी