Love Poetry (page 145)

लोग कहते हैं बहुत हम ने कमाई दुनिया

फ़ैज़ ख़लीलाबादी

लगा कि जैसे किसी काँपते हिरन को छुआ

फ़ैज़ ख़लीलाबादी

दिन उतरते ही नई शाम पहन लेता हूँ

फ़ैज़ ख़लीलाबादी

बात बन जाए जो तफ़्सील से बातें कर ले

फ़ैज़ ख़लीलाबादी

कोई फ़रियाद तिरे दिल में दबी हो जैसे

फ़ैज़ अनवर

ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

यूँ सजा चाँद कि झलका तिरे अंदाज़ का रंग

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शैख़ साहब से रस्म-ओ-राह न की

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फिर नज़र में फूल महके दिल में फिर शमएँ जलीं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

करो कज जबीं पे सर-ए-कफ़न मिरे क़ातिलों को गुमाँ न हो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जवाँ-मर्दी उसी रिफ़अत पे पहुँची

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो डर कैसा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अदा-ए-हुस्न की मासूमियत को कम कर दे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

''आप की याद आती रही रात भर''

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदाँ की एक सुब्ह

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदाँ की एक शाम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदगी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये मातम-ए-वक़्त की घड़ी है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये किस दयार-ए-अदम में...

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

यास

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

यहाँ से शहर को देखो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

याद

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वासोख़्त

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

उम्मीद-ए-सहर की बात सुनो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

टूटी जहाँ जहाँ पे कमंद

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुर्क शाएर नाज़िम-हिकमत के अफ़्कार

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम्हारे हुस्न के नाम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़