Love Poetry (page 240)

जहान-ए-हुस्न-ओ-नज़र से किनारा करना है

अासिफ़ शफ़ी

हर तरफ़ है फ़ुसूँ मोहब्बत का

अासिफ़ शफ़ी

एक यूसुफ़ के ख़रीदार हुए हैं हम लोग

अासिफ़ शफ़ी

दिल में वफ़ा की है तलब लब पे सवाल भी नहीं

अासिफ़ शफ़ी

ऐ मुझे 'मीर' के अशआ'र सुनाने वाले

अासिफ़ शफ़ी

रस्ते की अंजान ख़ुशी है

अासिफ़ साक़िब

घात

अासिफ़ साक़िब

ओझल हुई नज़र से बे-बाल-ओ-पर गई है

अासिफ़ साक़िब

किसे मजाल जो टोके मिरी उड़ानों को

अासिफ़ साक़िब

झंकार है मौजों की बहते हुए पानी से

अासिफ़ साक़िब

ग़ज़ल में दर्द का जादू मुझी को होना था

अासिफ़ साक़िब

दिल की मौजों की तड़प मेरी सदा में आए

अासिफ़ साक़िब

बज़्म-ए-सुख़न को आप की दिल-गीर चल पड़े

अासिफ़ साक़िब

बारिश कैसी जादूगर है

अासिफ़ साक़िब

ता-कि न निगाहों को अंधेरे नज़र आएँ

आसिफ़ रज़ा

तज़लील

आसिफ़ रज़ा

तख़्लीक़

आसिफ़ रज़ा

राज़

आसिफ़ रज़ा

मक़्सूद-अली-'दीवाना'

आसिफ़ रज़ा

जुर्म

आसिफ़ रज़ा

दूर की शहज़ादी

आसिफ़ रज़ा

ये मिरी बज़्म नहीं है लेकिन

आसिफ़ रज़ा

ये दिल में वसवसा क्या पल रहा है

आसिफ़ रज़ा

दिल और तरह आज तो घबराया हुआ है

आसिफ़ रज़ा

ख़ुदा से मशवरा माँगा है तेरे बारे में

अासिफ़ रशीद असजद

वो बे-हुनर हूँ कि है ज़िंदगी वबाल मुझे

अासिफ़ जमाल

साए की तरह कोई मिरे साथ लगा था

अासिफ़ जमाल

एक सर्द जंग है अब मोहब्बतें कहाँ

अासिफ़ जमाल

सदा-ए-क़ैस शौक़-ए-दश्त-पैमाई नमी-दानम

अासिफ़ अंजुम

कैसा तिलिस्म आज ये तारी है जिस्म में

अासिफ़ अंजुम