Love Poetry (page 241)
इक दिन ख़ुद को अपने अंदर फेंकूँगा
अासिफ़ अंजुम
भूल कर तू सारे ग़म अपने चमन में रक़्स कर
अासिफ़ अंजुम
दिए की आँख से जब गुफ़्तुगू नहीं होती
अशरफ़ यूसुफ़
उन से मिला तो फिर मैं किसी का नहीं रहा
अशरफ़ शाद
निकली वो ज़िंदगी से तो पामाल हो गया
अशरफ़ शाद
जो ज़िंदगी बची है उसे ख़ार क्या करें
अशरफ़ शाद
दे आया अपनी जान भी दरबार-ए-इश्क़ में
अशरफ़ शाद
चाँद तारों से भरा ये आसमाँ दे जाऊँगा
अशरफ़ शाद
ज़िंदगी
अशरफ़ सलीम
पर्दे मिरी निगाह के भी दरमियाँ न थे
अशरफ़ रफ़ी
हर एक रुख़ से मुझे लुत्फ़-ए-जुस्तुजू आए
अशरफ़ रफ़ी
अहद-ए-वफ़ा न याद दिलाएँ तो क्या करें
अशरफ़ रफ़ी
23-मार्च अज़ान-ए-सुब्ह-ए-नियाज़
अशरफ़ जावेद
गुल-ए-ख़ुर्शीद खिलाऊँगा चला जाऊँगा
अशरफ़ जावेद
बदल के देख लिए ज़ाविए उड़ानों के
अशरफ़ जावेद
उठ चुका दिल मिरा ज़माने से
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
इस जौर ओ जफ़ा से तिरे ज़िन्हार न टूटे
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
हैफ़ दिल में तिरे वफ़ा न हुई
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
दिल धड़कता है कि तू यार है सौदाई का
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
देखिए ख़ाक में मजनूँ की असर है कि नहीं
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
डरता हूँ मोहब्बत में मिरा नाम न होवे
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
बस-कि दीदार तिरा जल्वा-ए-क़ुद्दूसी है
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
अक्स भी कब शब-ए-हिज्राँ का तमाशाई है
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
ऐ तजल्ली क्या हुआ शेवा तिरी तकरार का
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
अगर आशिक़ कोई पैदा न होता
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
अबस अबस तुझे मुझ से हिजाब आता है
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
आलम में अगर इश्क़ का बाज़ार न होता
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
नग़्मा उल्फ़त का गा दिया मैं ने
अशोक साहनी साहिल
जो गुज़रती है कहा करता हूँ
अशोक साहनी साहिल
बस दिखा दे राह-ए-मय-ख़ाना कोई
अशोक साहनी साहिल