Love Poetry (page 369)
परेशानी है जी घबरा रहा है
अफ़सर मेरठी
जिन को हर हालत में ख़ुश और शादमाँ पाता हूँ मैं
अफ़सर मेरठी
असर देखा दुआ जब रात भर की
अफ़सर मेरठी
आग़ाज़ हुआ है उल्फ़त का अब देखिए क्या क्या होना है
अफ़सर मेरठी
वो हमारी सम्त अपना रुख़ बदलता क्यूँ नहीं
अफ़सर माहपुरी
उन से हर हाल में तुम सिलसिला-जुम्बाँ रखना
अफ़सर माहपुरी
शब को पाज़ेब की झंकार सी आ जाती है
अफ़सर माहपुरी
सरिश्क-ए-ग़म की रवानी थमी है मुश्किल से
अफ़सर माहपुरी
क्या बताएँ हाल-ए-दिल उन की शनासाई के ब'अद
अफ़सर माहपुरी
ग़म-ए-हयात के पेश-ओ-अक़ब नहीं पढ़ता
अफ़सर माहपुरी
बहार आएगी गुलशन में तो दार-ओ-गीर भी होगी
अफ़सर माहपुरी
अजीब चीज़ मोहब्बत की वारदात भी है
अफ़सर माहपुरी
तेरी ख़ुशबू का तराशा है ये पैकर किस ने
अफ़सर आज़री
तुम्हारे हिज्र में क्यूँ ज़िंदगी न मुश्किल हो
अफ़सर इलाहाबादी
मुझे गुम-शुदा दिल का ग़म है तो ये है
अफ़सर इलाहाबादी
वही जो हया थी निगार आते आते
अफ़सर इलाहाबादी
तुम्हारे हिज्र में क्यूँ ज़िंदगी न मुश्किल हो
अफ़सर इलाहाबादी
न हो या रब ऐसी तबीअत किसी की
अफ़सर इलाहाबादी
कुछ भी नहीं जो याद-ए-बुतान-ए-हसीं नहीं
अफ़सर इलाहाबादी
फ़लक उन से जो बढ़ कर बद-चलन होता तो क्या होता
अफ़सर इलाहाबादी
तिश्नगी बाक़ी रहे दीवानगी बाक़ी रहे
अफ़रोज़ तालिब
पल-दो-पल
अफ़रोज़ आलम
मोहब्बत
अफ़रोज़ आलम
ख़याल
अफ़रोज़ आलम
दवाम
अफ़रोज़ आलम
बे-क़रारी
अफ़रोज़ आलम
अक्स-बर-अक्स
अफ़रोज़ आलम
यूँ ख़बर किसे थी मेरी तिरी मुख़बिरी से पहले
अफ़रोज़ आलम
तू मेरी नींदें तलाशता है यही बहुत है
अफ़रोज़ आलम
ठोकर से फ़क़ीरों की दुनिया का बिखर जाना
अफ़रोज़ आलम