Love Poetry (page 368)

गए मंज़रों से ये क्या उड़ा है निगाह में

आफ़ताब हुसैन

फ़िराक़ मौसम की चिलमनों से विसाल लम्हे चमक उठेंगे

आफ़ताब हुसैन

बदल रहे हैं ज़माने के रंग क्या क्या देख

आफ़ताब हुसैन

अभी है हुस्न में हुस्न-ए-नज़र की कार-फ़रमाई

आफ़ताब हुसैन

ज़रा सी देर को चमका था वो सितारा कहीं

आफ़ताब हुसैन

ये जब्र भी है बहुत इख़्तियार करते हुए

आफ़ताब हुसैन

तुम्हारे बाद रहा क्या है देखने के लिए

आफ़ताब हुसैन

क़दम क़दम पे किसी इम्तिहाँ की ज़द में है

आफ़ताब हुसैन

निगाह के लिए इक ख़्वाब भी ग़नीमत है

आफ़ताब हुसैन

मुनाफ़िक़त का निसाब पढ़ कर मोहब्बतों की किताब लिखना

आफ़ताब हुसैन

मक़ाम-ए-शौक़ से आगे भी इक रस्ता निकलता है

आफ़ताब हुसैन

किसी नज़र ने मुझे जाम पर लगाया हुआ है

आफ़ताब हुसैन

करता कुछ और है वो दिखाता कुछ और है

आफ़ताब हुसैन

कहाँ किसी पे ये एहसान करने वाला हूँ

आफ़ताब हुसैन

कभी जो रास्ता हमवार करने लगता हूँ

आफ़ताब हुसैन

जब सफ़र से लौट कर आने की तय्यारी हुई

आफ़ताब हुसैन

घड़ी घड़ी उसे रोको घड़ी घड़ी समझाओ

आफ़ताब हुसैन

गए मंज़रों से ये क्या उड़ा है निगाह में

आफ़ताब हुसैन

दिल भी आप को भूल चुका है

आफ़ताब हुसैन

धूप जब ढल गई तो साया नहीं

आफ़ताब हुसैन

देखे कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर के रंग भी

आफ़ताब हुसैन

दे रहे हैं जिस को तोपों की सलामी आदमी

आफ़ताब हुसैन

अपना दीवाना बना कर ले जाए

आफ़ताब हुसैन

अना को बाँधता रहता हूँ अपने शे'रों में

आफ़ताब हुसैन

मुझ को मंज़र के सिले में वो सदा भेजता है

आफ़ताब अहमद शाह

ये रेग-ए-रवाँ याद-दहानी तो नहीं क्या

आफ़ताब अहमद

उम्र-ए-रफ़्ता मैं तिरे हाथ भी क्या आया हूँ

आफ़ताब अहमद

खुली आँखों में दर आने से पहले

आफ़ताब अहमद

है तेरे लिए सारा जहाँ हुस्न से ख़ाली

अफ़सर मेरठी

वतन का राग

अफ़सर मेरठी