Sad Poetry (page 125)

मिरे हम-रक़्स साए को बिल-आख़िर यूँही ढलना था

फ़रह इक़बाल

ख़ुद ही दिया जलाती हूँ

फ़रह इक़बाल

कैसे मंज़र हैं जो इदराक में आ जाते हैं

फ़रह इक़बाल

कहीं यक़ीं से न हो जाएँ हम गुमाँ की तरह

फ़रह इक़बाल

कहें हम क्या किसी से दिल की वीरानी नहीं जाती

फ़रह इक़बाल

कभी तुम भीगने आना मिरी आँखों के मौसम में

फ़रह इक़बाल

हमें तो साथ चलने का हुनर अब तक नहीं आया

फ़रह इक़बाल

एक मुद्दत से यहाँ ठहरा हुआ पानी है

फ़रह इक़बाल

देखा पलट के जब भी तो फैला ग़ुबार था

फ़रह इक़बाल

दर्द का समुंदर है सिर्फ़ पार होने तक

फ़रह इक़बाल

यारो हुदूद-ए-ग़म से गुज़रने लगा हूँ मैं

फ़राग़ रोहवी

हम से तहज़ीब का दामन नहीं छोड़ा जाता

फ़राग़ रोहवी

यारो हुदूद-ए-ग़म से गुज़रने लगा हूँ मैं

फ़राग़ रोहवी

नवाह-ए-जाँ में किसी के उतरना चाहा था

फ़राग़ रोहवी

मैं एक बूँद समुंदर हुआ तो कैसे हुआ

फ़राग़ रोहवी

ख़ूब निभेगी हम दोनों में मेरे जैसा तू भी है

फ़राग़ रोहवी

कहीं सूरज कहीं ज़र्रा चमकता है

फ़राग़ रोहवी

कहीं सूरज कहीं ज़र्रा चमकता है

फ़राग़ रोहवी

कभी यक़ीं से हुई और कभी गुमाँ से हुई

फ़राग़ रोहवी

कभी न सोचा था मैं ने उड़ान भरते हुए

फ़राग़ रोहवी

जो भी अंजाम हो आग़ाज़ किए देते हैं

फ़राग़ रोहवी

जिस दिन से कोई ख़्वाहिश-ए-दुनिया नहीं रखता

फ़राग़ रोहवी

हमारे साथ उमीद-ए-बहार तुम भी करो

फ़राग़ रोहवी

दिन में भी हसरत-ए-महताब लिए फिरते हैं

फ़राग़ रोहवी

दयार-ए-शब का मुक़द्दर ज़रूर चमकेगा

फ़राग़ रोहवी

फटी मश्कें लिए दिन-रात दरिया देखने वाले

फ़क़ीह हैदर

जिस्म में गूँजता है रूह पे लिक्खा दुख है

फ़क़ीह हैदर

हिज्र मैं जो ली गई तस्वीर है

फ़क़ीह हैदर

ज़िंदगी जब्र है और जब्र के आसार नहीं

फ़ानी बदायुनी

यूँ न क़ातिल को जब यक़ीं आया

फ़ानी बदायुनी