Sad Poetry (page 123)
मिरे चराग़ो मिरा गंज-ए-बे-कराँ ले लो
फ़रहान सालिम
मता-ए-दर्द मआल-ए-हयात है शायद
फ़रहान सालिम
मक्र-ए-हयात रुख़ की क़बा भी उतार दी
फ़रहान सालिम
मैं तिरे संग कैसे चलूँ हम-सफ़र तू समुंदर है मैं साहिलों की हवा
फ़रहान सालिम
खो बैठी है सारे ख़द-ओ-ख़ाल अपनी ये दुनिया
फ़रहान सालिम
अक्स कुछ न बदलेगा आइनों को धोने से
फ़रहान सालिम
आम है इज़्न कि जो चाहो हवा पर लिख दो
फ़रहान सालिम
बगूला बन के उड़ा ख़्वाहिशों के सहरा में
फ़रीद परबती
तमन्ना अपनी उन पर आश्कारा कर रहा हूँ मैं
फ़रीद परबती
सिकंदर हूँ तलाश-ए-आब-ए-हैवाँ रोज़ करता हूँ
फ़रीद परबती
रग-ओ-पै में सरायत कर गया वो
फ़रीद परबती
किसी पे करना नहीं ए'तिबार मेरी तरह
फ़रीद परबती
हमा-जिहत मिरी तलब जिस की मिसाल अब नहीं
फ़रीद परबती
तरब का रंग मोहब्बत की लौ नहीं देता
फ़रीद जावेद
हमें भी अपनी तबाही पे रंज होता है
फ़रीद जावेद
ये कहाँ से मौज-ए-तरब उठी कि मलाल दिल से निकल गए
फ़रीद जावेद
ये कहाँ से मौज-ए-तरब उठी कि मलाल दिल से निकल गए
फ़रीद जावेद
शौक़ का सिलसिला बे-कराँ है
फ़रीद जावेद
साज़ दे के तारों को छेड़ तो दिया तुम ने
फ़रीद जावेद
पहुँच के हम सर-ए-मंज़िल जिन्हें भुला न सके
फ़रीद जावेद
पहुँच के हम सर-ए-मंज़िल जिन्हें भुला न सके
फ़रीद जावेद
ना-शगुफ़्ता कलियों में शौक़ है तबस्सुम का
फ़रीद जावेद
न ग़ुरूर है ख़िरद को न जुनूँ में बाँकपन है
फ़रीद जावेद
न ग़ुरूर है ख़िरद को न जुनूँ में बाँकपन है
फ़रीद जावेद
न बुत-कदे में न का'बे में सर झुकाने से
फ़रीद जावेद
न बुत-कदे में न का'बे में सर झुकाने से
फ़रीद जावेद
किस उजाले का निशाँ हैं हम लोग
फ़रीद जावेद
किस से वफ़ा की है उमीद कौन वफ़ा-शिआर है
फ़रीद जावेद
किस से वफ़ा की है उमीद कौन वफ़ा-शिआ'र है
फ़रीद जावेद
जब भी शम-ए-तरब जलाई है
फ़रीद जावेद