Sad Poetry (page 124)
हम जिसे समझते थे सई-ए-राएगाँ यारो
फ़रीद जावेद
हमारे सामने बेगाना-वार आओ नहीं
फ़रीद जावेद
हमारे सामने बेगाना-वार आओ नहीं
फ़रीद जावेद
ग़ुबार दिल पे बहुत आ गया है धो लें आज
फ़रीद जावेद
तक़ाज़ा
फ़रीद इशरती
सहर होने तक
फ़रीद इशरती
काग़ज़ के फूल
फ़रीद इशरती
जब तमन्नाएँ मुस्कुराती हैं
फ़रीद इशरती
ग़म का बादल
फ़रीद इशरती
फ़नकार और मौत
फ़रीद इशरती
छिपकिली
फ़रीद इशरती
बे-बाक अँधेरे
फ़रीद इशरती
कुछ उन की जफ़ा उन का सितम याद नहीं है
फ़रीद इशरती
जला के दामन-ए-हस्ती का तार तार उठा
फ़रीद इशरती
है दाग़ दाग़ मिरा दिल मगर मलूल नहीं
फ़रीद इशरती
दिल में शगुफ़्ता गुल भी हैं रौशन चराग़ भी
फ़रीद इशरती
फूलों की ताज़गी में उदासी है शाम की
फ़राज़ सुल्तानपूरी
वो अक्स-ए-दिल-ए-आश्ना छोड़ आए
फ़राज़ सुल्तानपूरी
निकल के घर से और मैदाँ में आ के
फ़राज़ सुल्तानपूरी
इक दिल की ख़ातिर इतने तो फ़ित्ने कभी न थे
फ़राज़ सुल्तानपूरी
बिछड़ते दामनों में अपनी कुछ परछाइयाँ रख दो
फ़राज़ सुल्तानपूरी
अश्क-ए-ग़म आँखों ने बरसाया बहुत
फ़राज़ सुल्तानपूरी
तो मुझे एक झलक भी नहीं दिखलानी क्या
फ़राज़ महमूद फ़ारिज़
सदा-ए-कुन से भी पहले किसी जहान में थे
फ़राज़ महमूद फ़ारिज़
ज़िंदगी चुपके से इक बात कहा करती है
फ़रह इक़बाल
ज़रा सी रात ढल जाए तो शायद नींद आ जाए
फ़रह इक़बाल
सारे मंज़र दिलकश थे हर बात सुहानी लगती थी
फ़रह इक़बाल
राख उड़ती हुई बालों में नज़र आती है
फ़रह इक़बाल
मुद्दतों हम से मुलाक़ात नहीं करते हैं
फ़रह इक़बाल
मोहब्बत का दिया ऐसे बुझा था
फ़रह इक़बाल