Sad Poetry (page 126)
यूँ न किसी तरह कटी जब मिरी ज़िंदगी की रात
फ़ानी बदायुनी
या कहते थे कुछ कहते जब उस ने कहा कहिए
फ़ानी बदायुनी
उस को भूले तो हुए हो 'फ़ानी'
फ़ानी बदायुनी
शिकवा-ए-हिज्र पे सर काट के फ़रमाते हैं
फ़ानी बदायुनी
रूह अरबाब-ए-मोहब्बत की लरज़ जाती है
फ़ानी बदायुनी
रोज़-ए-जज़ा गिला तो क्या शुक्र-ए-सितम ही बन पड़ा
फ़ानी बदायुनी
रोज़ है दर्द-ए-मोहब्बत का निराला अंदाज़
फ़ानी बदायुनी
रोने के भी आदाब हुआ करते हैं 'फ़ानी'
फ़ानी बदायुनी
फिर किसी की याद ने तड़पा दिया
फ़ानी बदायुनी
ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
फ़ानी बदायुनी
नहीं ज़रूर कि मर जाएँ जाँ-निसार तेरे
फ़ानी बदायुनी
मौत का इंतिज़ार बाक़ी है
फ़ानी बदायुनी
मौत आने तक न आए अब जो आए हो तो हाए
फ़ानी बदायुनी
मर के टूटा है कहीं सिलसिला-ए-क़ैद-ए-हयात
फ़ानी बदायुनी
किसी के एक इशारे में किस को क्या न मिला
फ़ानी बदायुनी
इस दर्द का इलाज अजल के सिवा भी है
फ़ानी बदायुनी
हिज्र में मुस्कुराए जा दिल में उसे तलाश कर
फ़ानी बदायुनी
हर नफ़स उम्र-ए-गुज़िश्ता की है मय्यत 'फ़ानी'
फ़ानी बदायुनी
फ़ानी दवा-ए-दर्द-ए-जिगर ज़हर तो नहीं
फ़ानी बदायुनी
दुनिया मेरी बला जाने महँगी है या सस्ती है
फ़ानी बदायुनी
दिल-ए-मरहूम को ख़ुदा बख़्शे
फ़ानी बदायुनी
दिल सरापा दर्द था वो इब्तिदा-ए-इश्क़ थी
फ़ानी बदायुनी
दर्द-ए-दिल की उन्हें ख़बर क्या हो
फ़ानी बदायुनी
दैर में या हरम में गुज़रेगी
फ़ानी बदायुनी
बहला न दिल न तीरगी-ए-शाम-ए-ग़म गई
फ़ानी बदायुनी
आते हैं अयादत को तो करते हैं नसीहत
फ़ानी बदायुनी
आँख उठाई ही थी कि खाई चोट
फ़ानी बदायुनी
ज़ीस्त का हासिल बनाया दिल जो गोया कुछ न था
फ़ानी बदायुनी
ज़िंदगी जब्र है और जब्र के आसार नहीं
फ़ानी बदायुनी
ज़ब्त अपना शिआर था न रहा
फ़ानी बदायुनी