Sad Poetry (page 128)
मर के टूटा है कहीं सिलसिला-क़ैद-ए-हयात
फ़ानी बदायुनी
मर कर तिरे ख़याल को टाले हुए तो हैं
फ़ानी बदायुनी
मर कर मरीज़-ए-ग़म की वो हालत नहीं रही
फ़ानी बदायुनी
लुत्फ़ ओ करम के पुतले हो अब क़हर ओ सितम का नाम नहीं
फ़ानी बदायुनी
ले ए'तिबार-ए-वादा-ए-फ़र्दा नहीं रहा
फ़ानी बदायुनी
क्यूँ न नैरंग-ए-जुनूँ पर कोई क़ुर्बां हो जाए
फ़ानी बदायुनी
क्या कहिए कि बेदाद है तेरी बेदाद
फ़ानी बदायुनी
क्या छुपाते किसी से हाल अपना
फ़ानी बदायुनी
कुछ कम तो हुआ रंज-ए-फ़रावान-ए-तमन्ना
फ़ानी बदायुनी
कुछ बस ही न था वर्ना ये इल्ज़ाम न लेते
फ़ानी बदायुनी
कूचा-ए-जानाँ में जा निकले जो ग़िल्माँ भूल कर
फ़ानी बदायुनी
किसी के एक इशारे में किस को क्या न मिला
फ़ानी बदायुनी
ख़ुशी से रंज का बदला यहाँ नहीं मिलता
फ़ानी बदायुनी
ख़ुदा असर से बचाए इस आस्ताने को
फ़ानी बदायुनी
ख़ुद मसीहा ख़ुद ही क़ातिल हैं तो वो भी क्या करें
फ़ानी बदायुनी
ख़ल्क़ कहती है जिसे दिल तिरे दीवाने का
फ़ानी बदायुनी
जुस्तुजू-ए-नशात-ए-मुबहम क्या
फ़ानी बदायुनी
जीने की है उम्मीद न मरने का यक़ीं है
फ़ानी बदायुनी
जज़्ब-ए-दिल जब ब-रू-ए-कार आया
फ़ानी बदायुनी
जब पुर्सिश-ए-हाल वो फ़रमाते हैं जानिए क्या हो जाता है
फ़ानी बदायुनी
जब दिल में तिरे ग़म ने हसरत की बना डाली
फ़ानी बदायुनी
इश्क़ इश्क़ हो शायद हुस्न में फ़ना हो कर
फ़ानी बदायुनी
इब्तिदा-ए-इश्क़ है लुत्फ़-ए-शबाब आने को है
फ़ानी बदायुनी
हम मौत भी आए तो मसरूर नहीं होते
फ़ानी बदायुनी
हो काश वफ़ा वादा-ए-फ़र्दा-ए-क़यामत
फ़ानी बदायुनी
हासिल-ए-इल्म-ए-बशर जहल का इरफ़ाँ होना
फ़ानी बदायुनी
हर तबस्सुम को चमन में गिर्या-सामाँ देख कर
फ़ानी बदायुनी
हर साँस के साथ जा रहा हूँ
फ़ानी बदायुनी
हर घड़ी इंक़लाब में गुज़री
फ़ानी बदायुनी
गुज़र गया इंतिज़ार हद से ये वादा-ए-ना-तमाम कब तक
फ़ानी बदायुनी