Sad Poetry (page 129)
इक फ़साना सुन गए इक कह गए
फ़ानी बदायुनी
दुनिया-ए-हुस्न-ओ-इश्क़ में किस का ज़ुहूर था
फ़ानी बदायुनी
दुनिया मेरी बला जाने महँगी है या सस्ती है
फ़ानी बदायुनी
दिल की तरफ़ हिजाब-ए-तकल्लुफ़ उठा के देख
फ़ानी बदायुनी
दिल की काया ग़म ने वो पल्टी कि तुझ सा बन गया
फ़ानी बदायुनी
दिल की हर लर्ज़िश-ए-मुज़्तर पे नज़र रखते हैं
फ़ानी बदायुनी
दिल और दिल में याद किसी ख़ुश-ख़िराम की
फ़ानी बदायुनी
दैर में या हरम में गुज़रेगी
फ़ानी बदायुनी
बिजलियाँ टूट पड़ीं जब वो मुक़ाबिल से उठा
फ़ानी बदायुनी
बे-ज़ौक़-ए-नज़र बज़्म-ए-तमाशा न रहेगी
फ़ानी बदायुनी
बे-ख़ुदी पे था 'फ़ानी' कुछ न इख़्तियार अपना
फ़ानी बदायुनी
बेदाद के ख़ूगर थे फ़रियाद तो क्या करते
फ़ानी बदायुनी
बे-अजल काम न अपना किसी उनवाँ निकला
फ़ानी बदायुनी
अपनी जन्नत मुझे दिखला न सका तू वाइज़
फ़ानी बदायुनी
ऐ मौत तुझ पे उम्र-ए-अबद का मदार है
फ़ानी बदायुनी
ऐ बे-ख़ुदी ठहर कि बहुत दिन गुज़र गए
फ़ानी बदायुनी
ऐ अजल ऐ जान-ए-'फ़ानी' तू ने ये क्या कर दिया
फ़ानी बदायुनी
अब उन्हें अपनी अदाओं से हिजाब आता है
फ़ानी बदायुनी
अब लब पे वो हंगामा-ए-फ़रियाद नहीं है
फ़ानी बदायुनी
आप से शरह-ए-आरज़ू तो करें
फ़ानी बदायुनी
आँख उठाई ही थी कि खाई चोट
फ़ानी बदायुनी
आह से या आह की तासीर से
फ़ानी बदायुनी
आह अब तक तो बे-असर न हुई
फ़ानी बदायुनी
साहिल के तमाशाई हर डूबने वाले पर
फ़ना निज़ामी कानपुरी
सब होंगे उस से अपने तआरुफ़ की फ़िक्र में
फ़ना निज़ामी कानपुरी
क़ैद-ए-ग़म-ए-हयात भी क्या चीज़ है 'फ़ना'
फ़ना निज़ामी कानपुरी
कुछ दर्द की शिद्दत है कुछ पास-ए-मोहब्बत है
फ़ना निज़ामी कानपुरी
जब सफ़ीना मौज से टकरा गया
फ़ना निज़ामी कानपुरी
ग़म से नाज़ुक ज़ब्त-ए-ग़म की बात है
फ़ना निज़ामी कानपुरी
दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते
फ़ना निज़ामी कानपुरी