Sad Poetry (page 328)
आवाज़ का उस की ज़ेर-ओ-बम कुछ याद रहा कुछ भूल गए
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
ऐ शब-ए-ग़म मिरे मुक़द्दर की
आग़ाज़ बरनी
वो नज़र मेहरबाँ अगर होती
आग़ाज़ बरनी
दिल था कि ग़म-ए-जाँ था
आग़ाज़ बरनी
बे-हिसी इंसान का हासिल न हो
आग़ाज़ बरनी
अगर कुछ ए'तिबार-ए-जिस्म-ओ-जाँ हो
आग़ाज़ बरनी
नर्म रेशम सी मुलाएम किसी मख़मल की तरह
आग़ाज़ बलडांवी
ये कैसे बाल खोले आए क्यूँ सूरत बनी ग़म की
आग़ा शायर
चलेगा नहीं मुझ पे फ़ुक़रा तुम्हारा
आग़ा शायर
मिलना न मिलना ये तो मुक़द्दर की बात है
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
इक बात कहें तुम से ख़फ़ा तो नहीं होगे
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
शाइर-ए-रंगीं फ़साना हो गया
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
रोने से जो भड़ास थी दिल की निकल गई
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
न निकला मुँह से कुछ निकली न कुछ भी क़ल्ब-ए-मुज़्तर की
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
मिरे करीम इनायत से तेरी क्या न मिला
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
मस्कन वहीं कहीं है वहीं आशियाँ कहीं
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
लाख लाख एहसान जिस ने दर्द पैदा कर दिया
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
क्या कर रहे हो ज़ुल्म करो राह राह का
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
जिस ने तुझे ख़ल्वत में भी तन्हा नहीं देखा
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
जब्र को इख़्तियार कौन करे
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
जान देते ही बनी इश्क़ के दीवाने से
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
बुतों के वास्ते तो दीन-ओ-ईमाँ बेच डाले हैं
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
बहार आई है फिर चमन में नसीम इठला के चल रही है
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
दुनिया के जो मज़े हैं हरगिज़ वो कम न होंगे
आग़ा मोहम्मद तक़ी
गर एक शब भी वस्ल की लज़्ज़त न पाए दिल
आग़ा मोहम्मद तक़ी
याद में तेरी जहाँ को भूलता जाता हूँ मैं
आग़ा हश्र काश्मीरी
गोया तुम्हारी याद ही मेरा इलाज है
आग़ा हश्र काश्मीरी
याद में तेरी जहाँ को भूलता जाता हूँ मैं
आग़ा हश्र काश्मीरी
तुम और फ़रेब खाओ बयान-ए-रक़ीब से
आग़ा हश्र काश्मीरी
चोरी कहीं खुले न नसीम-ए-बहार की
आग़ा हश्र काश्मीरी