Sad Poetry (page 333)
आख़िरी दलील
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
ये नहर-ए-आब भी उस की है मुल्क-ए-शाम उस का
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
कभी न ख़ुद को बद-अंदेश-ए-दश्त-ओ-दर रक्खा
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
जिस को मेरी हालत का एहसास नहीं
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
जब अपनों से दूर पराए देस में रहना पड़ता है
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
इस तरह सताया है परेशान किया है
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
ग़म का मौसम बीत गया सो रोना क्या
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
दीवारों में दर होता तो अच्छा था
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
मैं जंगलों में दरिंदों के साथ रहता रहा
आफ़ताब शम्सी
देख कर उस को लगा जैसे कहीं हो देखा
आफ़ताब शम्सी
यादें
आफ़ताब शम्सी
वापसी
आफ़ताब शम्सी
शिकस्त
आफ़ताब शम्सी
रात, मामूल और हम
आफ़ताब शम्सी
पहली तारीख़
आफ़ताब शम्सी
मुदावा
आफ़ताब शम्सी
हिजरत
आफ़ताब शम्सी
गुज़रते लम्हों का मातम
आफ़ताब शम्सी
तलाश-ए-क़ाफ़िया में उम्र सब गुज़ारी है
आफ़ताब शम्सी
सभी बिछड़ गए मुझ से गुज़रते पल की तरह
आफ़ताब शम्सी
कोई अच्छी सी ग़ज़ल कानों में मेरे घोल दे
आफ़ताब शम्सी
देर तक रात अँधेरे में जो मैं ने देखा
आफ़ताब शम्सी
असीर-ए-जिस्म हूँ दरवाज़ा तोड़ डाले कोई
आफ़ताब शम्सी
पाता नहीं हूँ और किसी काम से लज़्ज़त
आफ़ताब शाह आलम सानी
आजिज़ हूँ तिरे हाथ से क्या काम करूँ मैं
आफ़ताब शाह आलम सानी
मुंकिर का ख़ौफ़
आफ़ताब इक़बाल शमीम
काया का कर्ब
आफ़ताब इक़बाल शमीम
हिज्र-ज़ाद
आफ़ताब इक़बाल शमीम
दीवार-ए-चीन
आफ़ताब इक़बाल शमीम
वो इत्र-ए-ख़ाक अब कहाँ पानी की बास में
आफ़ताब इक़बाल शमीम