Sad Poetry (page 335)

देखे कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर के रंग भी

आफ़ताब हुसैन

दे रहे हैं जिस को तोपों की सलामी आदमी

आफ़ताब हुसैन

बस एक बात की उस को ख़बर ज़रूरी है

आफ़ताब हुसैन

अस्ल हालत का बयाँ ज़ाहिर के साँचों में नहीं

आफ़ताब हुसैन

पछता रहे हैं दर्द के रिश्तों को तोड़ कर

आफ़ताब आरिफ़

कहूँ जो कर्ब फ़क़त कर्ब-ए-ज़ात समझोगे

आफ़ताब आरिफ़

मुझ को मंज़र के सिले में वो सदा भेजता है

आफ़ताब अहमद शाह

ये रेग-ए-रवाँ याद-दहानी तो नहीं क्या

आफ़ताब अहमद

उम्र-ए-रफ़्ता मैं तिरे हाथ भी क्या आया हूँ

आफ़ताब अहमद

सुख में होता है हाफ़िज़ा बेकार

अफ़सर मेरठी

मुझे फ़र्दा की फ़िक्र क्यूँ-कर हो

अफ़सर मेरठी

वतन का राग

अफ़सर मेरठी

यास है हसरत है ग़म है और शब-ए-दीजूर है

अफ़सर मेरठी

असर देखा दुआ जब रात भर की

अफ़सर मेरठी

आग़ाज़ हुआ है उल्फ़त का अब देखिए क्या क्या होना है

अफ़सर मेरठी

वो हमारी सम्त अपना रुख़ बदलता क्यूँ नहीं

अफ़सर माहपुरी

उन से हर हाल में तुम सिलसिला-जुम्बाँ रखना

अफ़सर माहपुरी

शब को पाज़ेब की झंकार सी आ जाती है

अफ़सर माहपुरी

सरिश्क-ए-ग़म की रवानी थमी है मुश्किल से

अफ़सर माहपुरी

मेरे लिए साहिल का नज़ारा भी बहुत है

अफ़सर माहपुरी

क्या बताएँ हाल-ए-दिल उन की शनासाई के ब'अद

अफ़सर माहपुरी

ग़म-ए-हयात के पेश-ओ-अक़ब नहीं पढ़ता

अफ़सर माहपुरी

सूरज कोई न कोई सितारा तुलू'अ हो

अफ़सर जमशेद

तेरी ख़ुशबू का तराशा है ये पैकर किस ने

अफ़सर आज़री

तुम्हारे हिज्र में क्यूँ ज़िंदगी न मुश्किल हो

अफ़सर इलाहाबादी

न हो या रब ऐसी तबीअत किसी की

अफ़सर इलाहाबादी

मुझे गुम-शुदा दिल का ग़म है तो ये है

अफ़सर इलाहाबादी

ख़बर देती है याद करता है कोई

अफ़सर इलाहाबादी

हमारा कोह-ए-ग़म क्या संग-ए-ख़ारा है जो कट जाता

अफ़सर इलाहाबादी

वही जो हया थी निगार आते आते

अफ़सर इलाहाबादी