Sad Poetry (page 354)

ज़िंदगी छोटी है सामान बहुत

अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

कहाँ शिकवा ज़माने का पस-ए-दीवार करते हैं

अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

जब कोई मेहरबान होता है

अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

जाना कहाँ है और कहाँ जा रहे हैं हम

अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

बेवफ़ा कहिए बा-वफ़ा कहिए

अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

मुद्दतों देख लिया चुप रह के

अब्दुल मजीद हैरत

मरहम-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर हो जाए

अब्दुल मजीद हैरत

मरहम ज़ख़्म-ए-जिगर हो जाए

अब्दुल मजीद हैरत

ईमाँ-नवाज़ गर्दिश-ए-पैमाना हो गई

अब्दुल मजीद हैरत

ईमाँ-नवाज़ गर्दिश-ए-पैमाना हो गई

अब्दुल मजीद हैरत

शाम-ए-ग़म और सितारों के सिवा

अब्दुल मजीद भट्टी

ये रोज़-मर्रा के कुछ वाक़िआत-ए-शादी-ओ-ग़म

अब्दुल हमीद अदम

लज़्ज़त-ए-ग़म तो बख़्श दी उस ने

अब्दुल हमीद अदम

किसी जानिब से कोई मह-जबीं आने ही वाला है

अब्दुल हमीद अदम

कभी तो दैर-ओ-हरम से तू आएगा वापस

अब्दुल हमीद अदम

जो अक्सर बार-वर होने से पहले टूट जाते थे

अब्दुल हमीद अदम

झाड़ कर गर्द-ए-ग़म-ए-हस्ती को उड़ जाऊँगा मैं

अब्दुल हमीद अदम

जब तिरे नैन मुस्कुराते हैं

अब्दुल हमीद अदम

दिल ख़ुश हुआ है मस्जिद-ए-वीराँ को देख कर

अब्दुल हमीद अदम

ऐ ग़म-ए-ज़िंदगी न हो नाराज़

अब्दुल हमीद अदम

ऐ दोस्त मोहब्बत के सदमे तन्हा ही उठाने पड़ते हैं

अब्दुल हमीद अदम

'अदम' रोज़-ए-अजल जब क़िस्मतें तक़्सीम होती थीं

अब्दुल हमीद अदम

ज़ख़्म दिल के अगर सिए होते

अब्दुल हमीद अदम

ज़बाँ पर आप का नाम आ रहा था

अब्दुल हमीद अदम

वो सूरज इतना नज़दीक आ रहा है

अब्दुल हमीद अदम

वो जो तेरे फ़क़ीर होते हैं

अब्दुल हमीद अदम

वो बातें तिरी वो फ़साने तिरे

अब्दुल हमीद अदम

वो अबरू याद आते हैं वो मिज़्गाँ याद आते हैं

अब्दुल हमीद अदम

उन को अहद-ए-शबाब में देखा

अब्दुल हमीद अदम

तौबा का तकल्लुफ़ कौन करे हालात की निय्यत ठीक नहीं

अब्दुल हमीद अदम