Sad Poetry (page 352)
न अदा मुझ से हुआ उस सितम-ईजाद का हक़
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
मरते दम नाम तिरा लब के जो आ जाए क़रीब
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
महफ़िल इश्क़ में जो यार उठे और बैठे
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
क्यूँ ख़फ़ा तू है क्या कहा मैं ने
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
ख़फ़ा मत हो मुझ को ठिकाने बहुत हैं
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
हर आन जल्वा नई आन से है आने का
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
ग़म याँ तो बिका हुआ खड़ा है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
ग़ैर के दिल पे तू ऐ यार ये क्या बाँधे है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
दोश-ब-दोश दोश था मुझ से बुत-ए-करिश्मा-कोश
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
दिल तो हाज़िर है अगर कीजिए फिर नाज़ से रम्ज़
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
बाग़ में जब कि वो दिल ख़ूँ-कुन-ए-हर-गुल पहुँचे
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
आँखों में मुरव्वत तिरी ऐ यार कहाँ है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
छलक जाती है अश्क-ए-गर्म बन कर मेरी आँखों से
अब्दुल रहमान बज़्मी
अबस ढूँडा किए हम ना-ख़ुदाओं को सफ़ीनों में
अब्दुल रहमान बज़्मी
कोई बस्ती कोई क़र्या नहीं है
अब्दुल क़वी ज़िया
मैं शब-ए-हिज्र क्या करूँ तन्हा
अब्दुल मतीन नियाज़
कैसे रखेंगे सर पे किसी का उधार हम
अब्दुल मतीन नियाज़
इंतिशार-ओ-ख़ौफ़ हर इक सर में है
अब्दुल मतीन नियाज़
हिज्र में गुज़री है उस रात की बातें न करो
अब्दुल मतीन नियाज़
ग़म-ए-हयात ग़म-ए-दिल निशात-ए-जाँ गुज़रा
अब्दुल मतीन नियाज़
दामन की फ़िक्र है न गरेबाँ की फ़िक्र है
अब्दुल मतीन नियाज़
अपने वहम-ओ-गुमान से निकला
अब्दुल मतीन नियाज़
सू-ए-सहरा ही चलें शायद रहें महफ़ूज़ कुछ
अब्दुल मन्नान तरज़ी
ज़लज़ले सख़्त आते रहे रात-भर
अब्दुल मन्नान तरज़ी
पुर्सिश है चश्म-ए-अश्क-फ़शाँ पर न आए हर्फ़
अब्दुल मन्नान तरज़ी
पा के तूफ़ाँ का इशारा दरिया
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मुद्दआ'-ओ-आरज़ू शौक़-ए-तमन्ना आप हैं
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मिरी निगाह को जल्वों का हौसला दे दो
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मर जाएँगे पिंदार का सौदा न करेंगे
अब्दुल मन्नान तरज़ी
क्या यहाँ देखिए क्या वहाँ देखिए
अब्दुल मन्नान तरज़ी